पिरगल ने जैन समाज के क्वारंटाइन सेन्टर की आवश्यकता पर बल दिया

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बेंगलूरु/दक्षिण भारत। कर्नाटक मारवाड़ी यूथ फेडरेशन के डीआर रांका डायलिसिस सेंटर के चेयरमैन एवं शहर के चिरपरिचित सामाजिक कार्यकर्ता कुशलराज पिरगल का मानना है कि कुछ अन्य शहरों की तरह बेंगलूरु में भी जैन समाज का अपना क्वारंटाइन सेन्टर होना चाहिए्‌। उन्होंने कहा कि आज देश में कोरोना महामारी अपने रौद्र रूप में है। देश के अधिकतर बड़े राज्य, विशेषकर मेट्रो व कास्मोपॉलिटन शहर कोरोना की गिरफ्त में हैं्‌। महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्यप्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु, राजस्थान कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या में अग्रणी पंक्ति में हैं तथा कर्नाटक भी उनका अनुसरण कर रहा है। ऐसे में देश में हर रोज, जहां कोरोना संक्रमितों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है, वहीं दूसरी ओर संसाधनों की सीमितता के कारण संक्रमितों की देखरेख नहीं हो पा रही है। कोरोना विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले महिनो़ में कोरोना संक्रमण और बढ़ेगा व अपने चरम पर होगा। अब तक इस महामारी की न तो कोई दवाई है और न ही कोई इंजेक्शन। बस सावधानी ही एकमात्र सहारा है। हम जितने सतर्क व सावधान रहेंगे उतने ही इस संक्रमण से बचे रहे सकेंगे। इस संक्रमण का कोई तय पैटर्न या लक्षण नहीं है। सामाजिक दूरी व एहतियात बरतना ही एक मात्र विकल्प रह जाता है।

पिरगल ने कहा कि जैन समाज एक सेवाभावी समाज है, जो कि हमेशा अपनों व दूसरों की सेवा के लिए हर आपदा में अग्रिम पंक्ति में रहता है। सरकार अपनी ओर से अनेक क्वारंटाइन सेन्टर खोलकर कम संक्रमित लोगों की देखभाल के लिए आइसोलेट कर रही है। ऐसे में आवश्यकता है कि हमारे जैन समाज का अपना स्वयं का एक क्वारंटाइन सेन्टर हो। उन्होंने कहा कि क्वारंटाइन सेन्टर खोलना बहुत ही आसान है, केवल हमें एक निर्णय लेना होगा। समाज के वरिष्ठ जनों, दानदाताओं, विभिन्न सभा संस्थाओं के पदाधिकारियों को मिलकर एक चिंतन करना चाहिए तथा जैन क्वारंटाइन सेन्टर की स्थापना करनी चाहिए्‌। यदि क्वारंटाइन सेन्टर हमारा होता है तो वातावरण भी सौहार्दपूर्ण होगा तथा माहौल भी सहज होगा। भोजन भी जैन रुचि के अनुसार उपलब्ध हो सकेगा।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हाल ही में मुम्बई व चेन्नई में भी इस तरह के जैन क्वारंटाइन सेन्टर खुल चुके हैं, जो कि इस महामारी के समय बहुत ही कारगार व मददगार साबित हो रहे हैं्‌। हम बेंगलूरुवासियों को भी इस ज्वलंत जरूरत के बारे में गहराई से चिन्तन करना चाहिए तथा समाज के लोगों को आगे आकर नई शुरुआत करनी चाहिए्‌। उन्होंने कहा कि शहर में जैन समाज के ऐसे कई भवन हैं जिन्हें जरूरत पड़ने पर क्वारंटाइन सेन्टर में आसानी से बदला जा सकता है तथा समाज के लोगों के लिए सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है।