JITO
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समाज के लोगों के मन में आशा की किरण जगाई

श्रीकांत पाराशर
समूह संपादक, दक्षिण भारत

मनुष्य जीवन में आपदाएं आती रहती हैं, भविष्य में भी आती रहेंगी, उनको कोई याद नहीं करता परंतु किसी बाढ में जब कोई तिनका भी सहारा बनकर आता है तो उसकी कहावत बन जाती है, मुहावरा बन जाता है और सदियों तक उसे याद किया जाता है। यह कोरोना संक्रमण काल जब भी किसी को याद आएगा तो इस संकट काल में लोगों की मदद के लिए आगे आया संगठन जीतो भी याद आएगा। जी हां, मैं जैन इंटरनेशनल ट्रेड आर्गेनाइजेशन (जीतो) की बात कर रहा हूं।

मार्च के अंतिम सप्ताह में जब प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना से डटकर मुकाबला करने का जनता से आह्वान किया और आने वाले संकट के प्रति आगाह किया तभी जीतो ने सोसाइटी के प्रति अपना दायित्व निभाने के लिए कमर कस ली थी। जब लोग इस विषय पर चर्चा करने लगे, संस्थाएं बैठकें करने लगीं, सरकारी अधिकारी भावी संकट से जूझने के लिए योजनाएं बनाने लगे तब तक तो जीतो सड़कों पर, फुटपाथों पर, झोंपड़ियों में, कंस्ट्रक्शन साइटों पर और सिर पर सामान रखकर अपने गांव की ओर निकले श्रमिकों की भूख का अहसास करते हुए दिन के दोनों वक्त सब जरूरतमंदों का पेट भरने का बीड़ा उठा चुका था। पैलेस ग्राउंड पर, अपनी जान जोखिम में डालकर बड़े स्तर पर हाइजेनिक वातावरण में भोजन बनवाकर उसकी वितरण व्यवस्था में जीतो के सदस्य जुट गए थे।

खास बात यह है कि सरकार ने जब तक लाकडाउन रखा तब तक जीतो के अध्यक्ष श्रीपाल खिंवसरा की टीम ने हर रोज सुबह शाम जरूरतमंदों को भोजन कराने के काम को निर्बाध रूप से, पूरी सिद्दत के साथ जारी रखा। बड़े स्तर के काम को ढ़ंग से अंजाम देने के लिए जिम्मेदारियां अलग अलग सौंपी जाती हैं, सो जीतो में भी अनेक सदस्यों की अलग अलग जिम्मेदारी थी जिसमें उनकी उल्लेखनीय भागीदारी रही। मैं सबके नाम जानता हूं परंतु उनके नामों का उल्लेख करके मैं एक बड़े संगठन को कुछ नामों तक सीमित कर संगठन के व्यापक महत्व को कम नहीं करना चाहता।

उदाहरण के तौर पर, जब केंद्र सरकार कोई भी अच्छा कदम उठाती है तो मोदी का ही नाम लिया जाता है क्योंकि नेतृत्व का नाम ले लिया तो हर इंडिविजुअल का नाम उसमें शामिल हो जाता है। इसलिए यहां जीतो की सराहना करता हूं तो इसका अर्थ है मैं जीतो के हर सदस्य की सराहना कर रहा हूं जो इसके कामों में, योजनाओं में बढचढ कर भाग लेते हैं। मुझे जहां तक जानकारी है, कोरोना काल में इस लंबे चले निशुल्क भोजन वितरण कार्यक्रम में 11 लाख से अधिक भोजन पैकेट वितरित कर उन लोगों की क्षुधा शांत की गई जिन्हें लाकडाउन के विकट समय में आसानी से दो वक्त का भोजन नहीं मिल रहा था।

अब जीतो ने जैन समाज की तात्कालिक महती जरूरत के मद्देनजर जैन समाज के सदस्यों के लिए कोरोना केयर सेंटर शुरू करने का बीड़ा उठाया है। पिछले कुछ दिनों से समाज में यह सुगबुगाहट थी कि जैन समाज इतना बड़ा है, उदारतापूर्वक दूसरों की मदद के लिए आगे भी आता है परंतु जब इस समुदाय के ही लोगों को कोरोना के कम या ज्यादा लक्षण आने पर क्वारंटाइन में जाना पड़ता है तो बहुत सारी कठिनाइयों से जूझना पड़ता है। साफसुथरा माहौल नहीं मिलता, सादा स्वच्छ शुद्ध शाकाहारी भोजन नहीं मिलता तथा अन्य कठिनाइयां भी होती हैं जिनका यहां जिक्र नहीं किया जा सकता। ऐसे में यदि जैन समाज का कोई सुव्यवस्थित क्वारंटाइन सेंटर या केयर सेंटर हो तो यह समाज की बहुत बड़ी सेवा होगी। समाज के हर उम्र के महिला पुरुषों को एक बड़ी राहत मिलेगी।

इस दिशा में चर्चाएं होने लगी, लोग इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत महसूस करने लगे। ऐसे में इस बार फिर जीतो ने लीड ली और कल यह घोषणा कर दी कि जीतो की ओर से एक अस्पताल के साथ अनुबंध कर दुरुस्त व्यवस्था के साथ कोरोना केयर सेंटर आगामी सोमवार से प्रारंभ कर दिया जाएगा। जिन लोगों के घर में किसी एक या दो सदस्यों को कोरोना के लक्षण दिखाई देते हैं तो उन सदस्यों को तुरंत एकांतवास की जरूरत होती है। कोरोना प्रभावित अगर महिला हो या बच्चा हो तो उनको होने वाली परेशानी की तो कल्पना मात्र से शरीर सिहर उठता है।

ऐसे लोगों को इस केयर सेंटर से अब भारी राहत मिलेगी क्योंकि उन्हें अनुकूल वातावरण में रखकर, दूसरों को संक्रमित होने से बचाया जा सकेगा और वे भी निष्फिक्र होकर क्वारंटाइन में जा सकेंगे। जीतो के इस कार्य की भी सर्वत्र सराहना हो रही है। इस काम में भी आगे बढकर कदम उठाने का जो साहस किया, उससे जीतो ने लोगों का दिल जीत लिया है। मैं सोचता हूं किसी भी अच्छे कार्य की सराहना होनी चाहिए, और उसमें कंजूसी की कोई गुंजाइश नहीं रखनी चाहिए। जीतो इस सराहना का हकदार है। मेरी जानकारी अनुसार इस सेवा के लिए फोन नं. 080- 26705511 पर सम्पर्क किया जा सकता है।