महिलाओं ने खुद संभाली कमान

बेंगलूरु/कोलकाता/दक्षिण भारत। इस समय पूरा देश कोरोना वायरस के संकट की दहशत में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विनम्र अपील के बाद सामाजिक संस्थाएं इस संघर्ष में सरकार का सहयोग और समर्थन कर रही हैं। देश में विप्र समाज के सबसे बड़े संगठन विप्र फाउंडेशन ने अपना दायित्व पहले ही संभाल लिया था। जैसे ही भारत में कोरोना संक्रमण फैलने की गति में तेजी दर्ज होने लगी और विदेशों के अनुभव से प्रमाणित होने लगा कि मास्क इसके फैलाव को रोकने में सहायक सिद्ध हो सकता है वैसे ही तत्काल सामाजिक संगठन विप्र फाउंडेशन ने निर्णय लिया कि वह अपनी पूरी ऊर्जा मास्क निर्माण करने व जरूरत के अनुसार वितरित करने में लगायेगा।

चूँकि संगठन की देश के लगभग सभी राज्यों में शाखाएँ हैं, सदस्य हैं, अतः इसे राष्ट्रीय अभियान बनाने का निर्णय लिया गया। विप्र फाउंडेशन के संस्थापक संयोजक सुशील ओझा बताते हैं कि यह विचार जहन में आया कि चूंकि एक बार उपयोग में आने वाले मेडिकल मास्क साधारण जनता अफोर्ड नहीं कर पायेगी, कारण कि इसे कई दिनों तक चलाना है सो ऐसे में कपड़े के मास्क ही बेहतर विकल्प सिद्ध होंगे। ओझा बताते हैं कि अधिकांश भारतीय घरों में सिलाई मशीन पायी जाती है व महिलाएं सिलाई में पारंगत होती हैं, इसी बात को दृष्टिगत रखते हुए हमने इस मास्क मुहिम का नेतृत्व महिलाओं को दिया जिससे उनमें एक नए उत्साह का संचार हो व लक्ष्य की प्राप्ति की जा सके।

भारतीय समाज की धर्म के प्रति आस्था को सफलता का पर्याय मानते हुए हमने निर्णय लिया कि यह मास्क अभियान श्री रामनवमी से श्री हनुमान जयंती तक चलाया जायेगा। इन सात दिनों की अवधि में सात लाख मास्क बनाकर उन्हें जरूरतमंदों तक पहुंचाने का संकल्प लेकर विप्र फाउंडेशन ने कार्य आरंभ किया।

ओझा ने बताया कि दिल्ली की युवा, प्रखर समाजसेविका चन्द्रकान्ता पुरोहित को नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाकर हमने मास्क मुहिम का बिगुल बजा दिया। देखते ही देखते महिलाएँ जुड़ने लगीं, द्विगुणित गति से जुड़ने लगी। चन्द्रकान्ता स्वयं बताती हैं कि हमने लक्ष्य रखा था कि प्रत्येक महिला सौ मास्क बनाये और वितरित करे। यह बात महिलाओं को खूब पसंद आयी कि उन्हें स्वयं अपने हाथों से मास्क बनाने हैं यानी किसी न किसी के जीवन दान का निमित्त बनना है, इससे बड़ा पुण्य कार्य और क्या होगा? खुद महिलाओं ने ही अपनी सखी, सहेली, रिश्तेदार, मित्र, पड़ोसी महिलाओं से संपर्क साधना शुरू किया और लोग जुड़ते गये, कारवाँ बनता गया।

श्री रामनवमी के दिन से दो चार की टोलियां बनाकर महिलाएँ मास्क वितरण को निकलीं तो उन्हें ऐसा गर्व व आत्मसन्तोष महसूस हो रहा था कि उनके हाथों से बने मास्क किसी की जिंदगी को बचाने के काम में आ रहे हैं। सात दिनों की इस मास्क मुहिम के साथ पूरे देश का विप्र समाज जुड़ता चला गया।

कोलकाता, हावड़ा, बेलूर, रिसड़ा, रानीगंज, पुरुलिया, सिलीगुड़ी, राउरकेला, बरगढ़, संबलपुर, कटक, रायपुर, जांजगीर, नागपुर, औरंगाबाद, मुंबई, ठाणे, भिवंडी, पुणे, वापी, सूरत, अहमदाबाद, बंगलूरू, हैदराबाद, बड़नगर, इंदौर, वाराणसी, गोरखपुर, वृन्दावन, गुड़गाँव, फरीदाबाद, वल्लभगढ़,महेन्द्रगढ़, दिल्ली, हरिद्वार, ऋषिकेष, वास्कोडिगामा, मापसा, मार्मोगांव, जुआरीनगर, पोरवरिम, कलूंगट, पणजी, जयपुर, सीकर, भरतपुर, दौसा, उदयपुर, सांगवाड़ा, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, पाली, जालोर, सिरोही,रेवदर, कुशलगढ़, मंडार, सायला, भांकरोटा, पीलीबंगा, मकावल, दत्तानी, छोटा घोटाद, वास, भीनमाल, आबू रोड, स्वरूपगंज, आहोर, जोधपुर, बाड़मेर, बिनोली, मेड़ता, नागौर, नोखा, बीकानेर, श्रीकोलायत, श्रीडूंगरगढ़, चूरू, राजगढ़, सिद्धमुख, पिलानी, तारानगर, झुंझुनूं, लक्ष्मणगढ़ आदि, 22 राज्यों के 126 शहरों में महिलाओं ने 7 दिनों में 7लाख की जगह 8 लाख मास्क की व्यवस्था कर दी।

यह महामारी है, लिहाजा युद्ध के हथियार बदल गए हैं।
यह महामारी है, लिहाजा युद्ध के हथियार बदल गए हैं।

मास्क वितरण भी एक ओर जहाँ विप्र फाउंडेशन के लोगों ने अभियान चलाकर किया वही दूसरी ओर अन्य संस्थानों, हॉस्पिटल, पुलिस व प्रशासन के माध्यम से मास्क वितरित किये गये। भारतीय सेना को 11 हजार, चिकित्सा मंत्री को 11 हजार, इंडिया टीवी फाउंडेशन को 10 हजार, पुलिस कमिश्नरेट, पुलिस चौकियों, जिलाधीश आदि को बड़ी संख्या में मास्क सौंपे गये। रेड क्रॉस सोसायटी को 5 हजार मास्क दिये गये। संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष महावीर प्रसाद शर्मा ने बताया कि आदिवासी गांवों, रेगिस्तान की सुदूर ढाणियों, वृद्ध आश्रमों, अन्ध आश्रमों, मन्दिरों आदि स्थानों पर मास्क वितरण कर फाउंडेशन अपने आप को धन्य महसूस कर रहा है।

विप्र फाउंडेशन के इस अभिनव आयोजन को मीडिया में भी खूब सराहना व स्थान मिला। टीवी चैनलों पर भी खबरें चली। इस अभियान की सफलता के पीछे सोशल मीडिया का भी बड़ा योगदान रहा। लॉक डाउन व आक्रामक सोशल मीडिया प्लानिंग ने मास्क मुहिम को परवान चढ़ाया। ट्विटर, फेसबुक, व्हाट्सएप्प पर इसकी बहुतायत देखी गयी। कई शिक्षाविदों, डाक्टरों व टीवी कलाकारों के वीडियो मैसेज से अपील का खासा असर दिखा। कुल मिलाकर इस अभियान के माध्यम से जो बात निकल कर आयी वह यह है कि आमजन के सहयोग से इस महामारी से लड़ने में खूब व विभिन्न प्रकार की मदद ली जा सकती है।

विप्र फाउंडेशन के संस्थापक सुशील ओझा ने कहा कि हमें खुशी और गर्व बोध है कि देश के मुखिया नरेन्द्र मोदी ने एक प्रकार से विप्र फाउंडेशन की मास्क मुहिम पर मोहर लगाते हुए ठीक ऐसी ही योजना की बात कही व महिलाओं से मास्क बनाने व बांटने की अपील की।