गलवान में भारतीय सेना से पिटने के बाद इस कानून से अपने नागरिकों की आवाज दबाएगा चीन

प्रतीकात्मक चित्र। स्रोत: PixaBay
प्रतीकात्मक चित्र। स्रोत: PixaBay

बीजिंग/दक्षिण भारत। पिछले साल गलवान घाटी में भारतीय जवानों के हाथों पिटने के बाद चीन में पीएलए की नीतियों पर कई तीखे सवाल उठे थे। अब इस पड़ोसी देश की सरकार ने अपने ही नागरिकों की आवाज दबाने के लिए एक नया विधेयक पारित किया है।

इसमें सैन्य कर्मियों की ‘मानहानि’ को लेकिर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। इसका संबंध साल 2018 के एक कानून से ही है, जिसके तहत यह देश एक चर्चित ब्लॉगर को जेल में डाल चुका है जिसने गलवान घाटी की भिड़ंत के बाद यह दावा किया था कि पीएलए के मारे गए जवानों की तादाद घोषित संख्या से ज्यादा हो सकती है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) की स्थायी समिति ने विधेयक को मंजूरी दे दी है। इसमें ऐसे प्रावधान ​किए गए हैं कि अगर कोई व्यक्ति या संगठन किसी भी प्रकार से सेना, सशस्त्र बल के जवानों के सम्मान को क्षति पहुंचाता है या उनका अपमान करता है तो उसे कड़ी सजा दी जाएगी।

यही नहीं, अगर कोई सैन्यकर्मियों के सम्मान में बनाए गई पट्टिकाओं को भी अप​वित्र करता है तो उसे दंड भुगतना होगा। स्थानीय मीडिया के अनुसार, ऐसे किसी भी मामले में अभियोजक जनहित याचिका दायर कर सकेंगे। यह ‘शहीदों’ की मानहानि को पहले से प्रतिबंधित करने वाले कानूनी उपायों की शृंखला में जुड़ा नया उपाय है।

बता दें कि चीन में सोशल मीडिया पर मशहूर ब्लॉगर क्यू जिमिंग सिर्फ इस ‘अपराध’ के कारण आठ महीनों की सजा भुगत रहे हैं, क्योंकि उन्होंने गलवान भिड़ंत मामले पर कहा कि हताहत चीनी जवानों की वास्तविक संख्या ज्यादा हो सकती है। उनकी टिप्पणी अधिकारियों की नजर में आ गई और उन्हें जेल भेज दिया गया। उन्हें सैनिकों की ‘बदनामी’ का दोषी पाया गया है।