त्रिफला तीन श्रेष्ठ औषधियों हऱड, बहे़डा व आंवला को मिलाकर बना मिश्रण है। यह प्रकृति का अनमोल उपहार है। त्रिफला सर्व रोगनाशक, रोग प्रतिरोधक और आरोग्य प्रदान करने वाली औषधि है। त्रिफला एंटी-बायोटिक और एंटी-सेप्टिक भी है। त्रिफला का प्रयोग शरीर में वात, पित्त और कफ का संतुलन बनाए रखता है। यह रोजमर्रा की आम बीमारियों के लिए बहुत प्रभावकारी औषधि है फिर चाहे वह सिर का रोग हो या चर्म रोग, रक्त दोष हो मूत्र रोग या फिर पाचन संस्थान संबंधी रोग। यह सभी रोगों का रामबाण है।झ्श्न्यत्रद्यह्थ्·र्ैं ूय्द्बत्रय् द्धढ्ढणक्कय्ॅजिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है और इसके कारण वह बार-बार बीमार प़डते हैं। उन लोगों को त्रिफला का सेवन करना चाहिए। त्रिफला के सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता ब़ढती है जिससे शरीर को बीमारियों से ल़डने की क्षमता मिलती है। प्रतिरोधक क्षमता से शरीर बाहरी तत्वों के खिलाफ आसानी से ल़ड सकता है। त्रिफला, शरीर में एंटीबॉडी के उत्पादन को ब़ढावा देता है जो शरीर में एंटीजन के खिलाफ ल़डते है और बॉडी को बैक्टीरिया मुक्त रखते है।झ्ष्ठट्ट ·र्ष्ठैं द्यह्ख्ह्र ·र्ष्ठैं ्यध्ॅ ृद्बल्त्रत्रिफला की तीनों ज़डी बूटियां आंतरिक सफाई को ब़ढावा देती हैं। त्रिफला के चूर्ण को गौमूत्र के साथ लेने से अफारा, उदर शूल, प्लीहा वृद्धि आदि अनेकों तरह के पेट के रोग दूर हो जाते हैं।·र्ैंŽज् ·र्ैंर्‍ फ्द्बडद्भय् द्बष्ठ्र ·र्ैंय्द्यख्द्यकब्ज की समस्या होने पर त्रिफला बेहद कारगर होता है। इसे खाने से कब्ज की काफी पुरानी समस्या भी दूर भाग जाती है। त्रिफला चूर्ण हल्के गर्म दूध अथवा गर्म पानी के साथ लेने से कब्ज की समस्या दूर हो जाती है।ब्र्‍द्बह्ज्ज्ध्ह्यद्धद्म द्धढ्ढणक्कय्ॅअगर आपको एनीमिया से पीि़डत हैं तो त्रिफला का सेवन आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। नियमित रूप से त्रिफला का सेवन करने से शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं ब़ढती है जिससे शरीर में हीमोग्लोबिन ब़ढने लगता है।ॅैंट्टर्‍-ृय्स्र€फ्र्‍ठ्ठष्ठ्रट्ट ब्स् ्यख़य्र्ड्डैंध्य्त्रिफला में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट गुण उम्र के असर को बेअसर करते है। त्रिफला के सेवन से उम्र ब़ढाने वाले कारक कम होते है जिसके कारण आप उम्र से ज्यादा जवां दिखते हैं।ठ्ठय्द्भ्यद्धट्टर्‍ज् ·र्ष्ठैं ्यध्ॅ र्झ्द्भह्ख्र्‍डायबिटीज के उपचार में त्रिफला बहुत प्रभावी होता है। यह पेन्क्रियाज को उत्तेजित करने में मदद करता है जिससे इंसुलिन की मात्रा उत्पन्न होती है और शरीर इंसुलिन की उचित मात्रा और शर्करा के स्तर को बनाए रखता है।