effects of facebook
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बेंगलूरु। एक नए सर्वेक्षण से पता चला है कि फेसबुक का उपयोग करने से अवसाद का कोई खतरा नहीं है और ‘फेसबुक तनाव’ का पहले खड़ा किया गया हौव्वा बेबुनियाद है। वैज्ञानिकों ने अध्ययन कर यह सुझाव दिया गया कि मरीजों और उनके अभिभावकों को ‘फेसबुक तनाव’ के बारे सचेत करना गैरजरूरी है।

शोधकर्ताओं ने 18-23 उम्र के 190 बच्चों से पिछले वर्ष जून और जुलाई महीने के बीच सात दिनों की अवधि में 43 संदेश भेजकर सवाल पूछा। उनसे यह पूछा गया कि क्या वे इस वक्त ऑनलाइन हैं? कितने मिनट से ऑनलाइन हैं? और वे इंटरनेट पर क्या करते हैं?

इस सर्वेक्षण में पाया गया कि ये बच्चे ऑनलाइन रहने के दौरान आधे समय फेसबुक पर रहते हैं। जब इस आंकड़े को तनाव से जोड़कर देखा तो उन्हें ‘फेसबुक तनाव’ की कोई संभावना नजर नहीं आई। उनका कहना है कि यह अध्ययन सोशल नेटवर्किंग साइट्स और अवसाद के जोखिम के सम्बंध पर पहला वैज्ञानिक साक्ष्य है।

वहीं शिशु चिकित्सक कहते हैं कि बच्चों के सोशल मीडिया व्यवहार को उसकी पूरी दिनचर्या के आधार पर समझने की कोशिश करें। यदि बच्चे की मनोवृत्ति में विशेष बदलाव नहीं आता है, उनके दोस्तों की संख्या ठीक-ठाक है और वह स्कूल में मिला काम नियमित तरीके से करता है, तो अभिभावकों को अधिक परेशान होने की जरूरत नहीं है।