नवजात शिशु को सुलाते वक्त खास ध्यान देने की जरूरत होती है। कई बार तकिए, चादर या फिर किसी सॉफ्ट टॉय के कारण ही बच्चों का दम घुटने की आशंका रहती है। शोध कहते हैं कि सोते में दम घुटने के कारण भी कई बच्चों की मृत्यु हो जाती है, इसे सडन इंफैन्ट डेथ सिंड्रोम या सिड्स कहते हैं। यही कारण है कि सोने के वक्त उन सारी बातों पर ध्यान देना जरूरी है जो किसी भी तरह से बच्चे के लिए खतरनाक हो सकती हैं। तो जानें, बच्चे को सुलाने के कुछ तरीके ताकि बच्चे के साथ आप भी चैन की नींद सो सकें।्यद्धडत्रद्य फ्य्र्ड्डैं ृय्स्द्य क्वय्ध्र्‍ ब्ह्बिस्तर पर गैरजरूरी चीजें न रखें। कई बार माता-पिता कई सारे तकिए, खिलौने आदि बच्चे के आसपास रख देते हैं। इनसे भी बच्चे को खतरा रहता है क्योंकि उसका श्वसन तंत्र शुरुआती सालभर तक मजबूत नहीं रहता है।द्भब्य्ैं द्म फ्रुध्य्ॅैंबहुत ही ढीले-ढाले पालने में या बीन बैग में बच्चे को सुलाना नहीं चाहिए, इससे उन्हें गर्दन और पीठ में दर्द हो सकता है। साथ ही इनसे लु़ढकने का भी डर रहता है। अगर बच्चा प्रिबॉर्न है तो सोने के वक्त उसका ध्यान रखना और भी जरूरी है क्योंकि सिड्स के सबसे ज्यादा मामले इन्हीं में देखने में आते हैं।त्रय्झ्द्बय्द्म ·र्ैंय् द्यक्वष्ठ्र क्द्भय्द्मकमरे का तापमान न ज्यादा गर्म हो, न ज्यादा ठंडा। कोशिश करें कि कमरे का तापमान ३० से ऊपर न जाए, इससे भी दम घुटने का डर होता है। ठंड के मौसम में बच्चे को कनटोप पहनाकर न सुलाएं। रूम का ताप ज्यादा ठंडा न हो क्योंकि इससे बच्चा सो नहीं सकेगा।द्धङ्गय्ष्ठ ·र्ैंर्‍ झ्ह्यज्प्रय्द्मबच्चे को कभी भी पेट के बल न सुलाएं। इससे सिड्स की आशंका रहती है, बच्चा अगर खुद से पेट के बल सो जाता है तो धीरे से उसे पीठ के बल लिटा दें। एकदम छोटे बच्चे के पास सटाकर कोई नर्म तकिया न रखें, बल्कि उसके आसपास रहने की कोशिश करें।ज्द्ध ·र्ैंद्यष्ठ्र ·र्ैंह्-डध्र्‍्यझ्ैंख्कई माता-पिता बच्चे को बीच में सुलाते हैं। अगर आप भी ऐसा कर रहे हों तो ध्यान रखें कि नींद में कभी भी उसपर हाथ य पैर न प़डे, ये स्थिति नवजात के लिए खतरनाक हो सकती है। मुंह तक चादर खींचकर सोने से भी बीच में सोए बच्चे को सांस लेने में परेशानी का डर रहता है।