फेंफ़डों में होने वाली बीमारी टीबी का अगर सही समय पर इलाज ना हो तो यह ब्रेन और स्पाइन तक पहुंच सकती है। ब्रेन और स्पाइन में टीबी होने की वजह से मरीज को पैरेलिसिस हो सकता है और वह कोमा में भी जा सकता है। इस बीमारी में लंबे समय तक बुखार के साथ-साथ सिरदर्द भी रह सकता है। यह एक संक्रमित बीमारी है। हाईजीन पर ध्यान नहीं देने के साथ-साथ जिन लोगों के घर बहुत पास-पास होते हैं उनमें भी यह बीमारी होती है। विशेषकर जिन लोगों की इम्युनिटी पावर कमजोर होती है, उन्हें यह बीमारी जल्दी होती है। इमसें लंग्स में बलगम जमा होता है, जिसका सही समय पर इलाज नहीं होने से ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड को प्रभावित करती है। यह ब्लड के माध्यम से किसी भी पार्ट में फैल जाती है इसलिए पूरा ट्रीटमेंट लेना चाहिए। इलाज बीच में ना छो़डें। छह महीने से १८ महीने तक पूरा इलाज करवाएं।ख्ध् फ्·र्ैंत्रर्‍ ब्स्र ब्यरद्भय्ैंटीबी का प्रारंभिक लक्षण कमर में दर्द और हल्का बुखार, भूख नहीं लगना और वजन कम होना है। कमर के जिस हिस्से में दर्द हो उसका एक्स-रे करवाकर देखें। हड्डियां गल तो नहीं रही हैं। शुरुआत में डायग्नोस नहीं होने पर बीमारी फैलकर री़ढ की २-५ हड्डियों को गला सकती है। टीबी की मवाद बन जाती है। इससे स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव आने की वजह से हाथ-पैरों में लकवा जाता है।इससे बचने के लिए पेशंट की ब़डी सर्जरी की जाती है। ऑपरेशन से मवाद हटाया जाता है। गली हुई हड्डियों के अलावा बची हुई हड्डी को स्क्रू और रॉड से फिट किया जाता है। ऑपरेशन के बाद भी़ड-भा़ड वाले इलाके में जाने से बचें। खुले स्थान पर रहें, साफ-सफाई रखें।·र्स्ैंफ्ष्ठ झ्ब्घ्य्द्मष्ठ्र द्धश्नष्ठद्म ट्टर्‍द्धर्‍?लंबे समय तक बुखार रहने के बाद सिर में दर्द शुरू हो जाए। दिमागी बुखार को सबसे पहले डायग्नोस करें। री़ढ की हड्डी से पानी निकालकर जांच करवाई जाती है। लंबे समय तक सिर दर्द होना, उल्टी आना और होश में गिरावट आना। कॉ्प्लिलकेशन होने पर दिमाग के पानी का प्रवाह कम हो जाता है। दिमाग में पानी की थैली का साइज ब़ढ जाता है। इससे पेशेंट कोमा में जा सकता है। सर्जरी करके एक्सट्रा पानी को नली के जरिए बाइपास करके पेट से बाहर निकाला जाता है।