पालक में मौजूद सभी तत्व ब़ढते बच्चों की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है। शायद आपके बच्चों को भी ‘पपई द सेलर मैन’’ जैसे कॉर्टून से पालक खाने की प्रेरणा मिली हो। पालक को खाते ही उसमें गजब की शक्ति आ जाती है। अगर आदत नहीं तो आज ही अपने बच्चे को पालक खाने की आदत डालें। जी हां, पालक को आयरन का ‘पावर हाउस’’ कहा जाता है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि पालक में कैलोरी, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फैट, फाइबर और मिनरल तत्व होता हैं? साथ ही पालक में विभिन्न मिनरल तत्व जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन तथा विटामिन ए, बी, सी आदि प्रचुर मात्रा में पाया जाते हैं। इसलिए इसमें मौजूद यह सभी तत्व ब़ढते बच्चों की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है। जानें पालक बच्चों की सेहत को किस तरह फायदेमंद होता है? ब्यरद्भय्ैं द्बफ्त्फ् द्धद्मत्रर्‍ ब्स्र द्बज्द्धरूत्रकैल्शियम, मैग्नेश्यिम और फोस्फोरस से भरपूर पालक हड्डियों के लिए फायदेमंद है। यह हड्डियों को स्वस्थ बनाने के साथ मजबूत बनाता है। इसके अलावा, पालक विटामिन ’’के’’ का एक बहुत अच्छा स्रोत है, जो हड्डियों में कैल्शियम को बनाए रखने में मदद करता है। आयरन के साथ-साथ इसमें प्रोटीन के साथ एमिनो एसिड भी पाया जाता है। जो किसी भी हाई प्रोटीन फूड से बेहतर होता है। ंद्भरू्यद्मट्टर्‍ ·र्ैंह् द्धष्ठब्त्रद्य द्धद्मय्ॅमल्टीविटामिन पालक में सभी तरह के खास विटामिन पाए जाते हैं। जिससे बच्चे का इम्यून सिस्टम मजबूत रहता है। इतना ही नहीं, पालक विटामिन के’’ का सबसे अच्छा स्रोत है और इसमें पाया जाने वाला बीटा कैरोटिन के कारण इसके सेवन से बच्चों का पाचनतंत्र मजबूत होता है और यह भूख ब़ढाने में सहायक होता है। अगर आपका बच्चा खाना खाने में अनाकानी करता है तो उसे आज से ही पालक खाने को दें।ृय्ैंक्वह्र ·र्ष्ठैं ्यध्ॅ ृमच्णय्अगर आप चाहते हैं कि आपके बच्चे की आंखों पर चश्मा न लगें तो उसके आहार में पालक को शामिल करें। पालक बच्चों की आंखों के लिए बेहद अच्छा होता है इसमें विटामिन ए और ल्यूटिन जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। विटामिन ’’ए’’ कॉर्निया की रक्षा करने में मदद करता है और ल्यूटिन पराबैंगनी प्रकाश से आंखों की रक्षा करता है। ्यठ्ठब्य्ंठ्ठुष्ठप्रय्द्म फ्ष्ठ द्धघ्य्ॅछोटे बच्चों में पानी की कमी ब़डे बच्चों की तुलना में ज्यादा पाई जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि वे ब़डे की तुलना में ज्यादा जल्दी तरल पदार्थ खोते हैं। और पालक में पानी की मात्रा लगभग ९० प्रतिशत होती है और यह प्राकृतिक तरल पदार्थ से भरा होता है। इसी वजह से यह बच्चों को डिहाइड्रेशन से बचाता हैं।