मधुमेह के रोगियों में हृदय की बीमारियां स्वस्थ व्यक्ति की तुलना में ज्यादा होती हैं। मधुमेह पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं होने के कारण हृदय की रक्त नालियों (धमनियों) में कोलेस्ट्रॉल जमा होने लगता है, जिससे रक्त के प्रवाह में रुकावट आ जाती है। परिणामस्वरूप हृदय की मांसपेशियों को पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं मिल पाता, जिसकी वजह से धमनियां अवरुद्ध हो जाती हैं और हृदयाघात हो सकता है। मधुमेह से पीि़डत व्यक्ति को उच्च रक्तचाप, मोटापा, धूम्रपान आदि की वजह से हृदय रोग होने की आशंका बनी रहती है। अगर आपको सीने में दर्द या सांस लेने में कठिनाई महसूस होती हो तो तत्काल चिकित्सक को दिखाएं और तद्नुरूप उपचार कराएं।च्णह्ट्टर्‍ थ्द्ब्यद्मद्भय्ैं ॅप्ैं द्मफ्ह्र ·र्ैंर्‍ क्वद्यय्द्धर्‍मधुमेह के रोगियों में छोटी धमनियों एवं नसों (स्नायु तंत्र) में खराबी अधिकतर पाई जाती है। ये खराबियां आगे चलकर कई गम्भीर समस्याएं उत्पन्न करती हैं। इन ग़डबि़डयों की वजह से निम्न अंगों को नुकसान होता है। मधुमेह के रोगी को आंख की कई तकलीफें परेशान कर सकती हैं। अधिकतर मरीजों में ये तकलीफें अल्पकालीन होती हैं, जो मधुमेह पर प्रभावी नियंत्रण से रोकी जा सकती हैं। कुछ मधुमेह रोगियों की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए खराब हो सकती है।थ्रुैंथ्ध्य् ्यख्रक्वद्मय्रक्त में ग्लूकोज की मात्रा अधिक होने से आंख के लैंस में खराबी हो सकती है, जिससे नजर धुंधली हो जाती है। रक्त में ग्लूकोज के स्तर को सामान्य स्तर पर रखने से इसे रोका जा सकता है।द्बह्यत्रद्भय्यद्ध़ख्रआंख के लैंस में मधुमेह के कारण धुंधलापन एवं कम दिखना मोतियाबिन्द होने का लक्षण है। मोतियाबिन्द ऑपरेशन द्वारा ठीक किया जा सकता है।द्यष्ठ्यट्टद्मय् ·र्ैंह् द्मरु·र्ैंफ्य्द्मरेटिना को छोटी-छोटी धमनियां रक्त पहुंचाती हैं, उन धमनियों की खराबी से रेटिना को नुकसान हो सकता है। मधुमेह से पीि़डत व्यक्ति को नियमित रूप से अपनी आंखों की जांच कराते रहना चाहिए, जिससे आंखों की रोशनी को बचाया जा सके, क्योंकि अनियमित मधुमेह से रेटिना की खराबी के कारण आंखों की रोशनी कम होती जाती है। समय पर इसका इलाज करवाने से दृष्टि बचाई जा सकती है।मधुमेहग्रस्त व्यक्ति को जब भी लक्षण नजर आने लगें तो आंखों की जांच करा लेनी चाहिए और मधुमेह को नियंत्रित करने का उपाय करना चाहिए।ख्रुख्रष्ठश्च ॅप्ैं झ्ष्ठप्रय्य्द्ध ·र्ैंर्‍ झ्द्यष्ठप्रय्य्द्मर्‍मधुमेह की बीमारी में गुर्दो पर बहुत हानिकारक प्रभाव प़डता है। सामान्य स्थिति में व्यक्ति के मूत्र में प्रोटीन नहीं पाया जाता, लेकिन अनियमित एवं लम्बे समय से मधुमेह के रोगी के मूत्र में प्रोटीन आने लगता है। मूत्र में अधिक ग्लूकोज होने से पेशाब की थैली, जननांगों एवं गुर्दों में जीवाणुओं का संक्रमण हो सकता है। मधुमेह के रोगी के पेशाब के रास्ते में संक्रमण हो जाता है तो प्राय: बार-बार मूत्र त्याग करेंगे। मूत्र विसर्जन करते समय जलन महसूस होले लगती है। कमर के नीचे वाले हिस्से में दर्द होने लगता है। ऐसी परिस्थितियों में व्यक्ति को नियमित रूप से अपना चिकित्सकीय परीक्षण करवाते रहना चाहिए।