दूषित हवा कोकीन जैसी जहरीली और नशीली दवा से भी खतरनाक होती है। वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि कोकीन के इस्तेमाल से जितने दिल के दौरे प़डते हैं, उससे कहीं ज्यादा दूषित हवा की वजह से प़डते हैं।गुस्सा, मारिजुआना का इस्तेमाल और सांस या छाती की तकलीफ भी दिल के दौरे की वजह बन सकती है, लेकिन सबसे ज्यादा खतरा वायु प्रदूषण से है, खासतौर पर तब, जबकि आप भारी ट्रैफिक के बीच से गुजर रहे हों। एक रिसर्च के मुताबिक दिल के मरीजों को दूषित हवा को बेहद गंभीरता से लेना चाहिए। बैल्जियम की हैसेल्ट यूनिवर्सिटी के टिम नारोट ने यह रिसर्च की है। नारोट उम्मीद करते हैं कि उनका शोध डाक्टरों को वायु प्रदूषण के खतरों के बारे में सोचने के लिए प्रभावित करेगा और इस बारे में वे एक मरीज के बारे में नहीं बल्कि पूरे समुदाय के लिहाज से सोचेंगे। वह कहते हैं कि डॉक्टर हमेशा एक मरीज के बारे में सोचते हैं। तब वे कारक ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं लगते जिनसे खतरा कम होता है, लेकिन वहीं कारक जब पूरे समुदाय को प्रभावित करते हैं तो कहीं ज्यादा खतरनाक हो जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन वायु प्रदूषण को सेहत के लिए एक प्रमुख खतरा मानता है। इसकी वजह से हर साल लगभग २० लाख लोगों की मौत होती है। नारोट की टीम ने अपने शोध के लिए ३६ अलग-अलग अध्ययनों के जरिए डाटा जुटाया और दिल के दौरों की वजह बनने वाले कारकों की गणना की। सबसे ब़डा खतरा ट्रैफिक में होना पाया गया। उसके बाद शारीरिक थकान, कॉफी और वायु प्रदूषण के खतरे का पता चला। इनके बाद कोकीन, मारिजुआना और सांस की तकलीफ जैसे कारक ब़डी वजह बने। शोधकर्ता कहते हैं कि अगर एक व्यक्ति के लिए देखा जाए तो कोकीन सबसे ब़डी वजह हो सकती है, लेकिन बात पूरे समुदाय की हो तो ट्रैफिक सबसे ब़डा कारक बन जाता है। यह बात खतरनाक इसलिए है क्योंकि पिछले साल विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक अध्ययन के आधार पर कहा था कि एशिया के कई ब़डे शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर तय सीमा से बहुत ज्यादा है। इसका नतीजा हर साल ५ लाख ३० हजार मौतों के रूप में सामने आता है।