प्रतीकात्मक चित्र
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वॉशिंगटन/एपी। कोरोना वायरस संक्रमण के बाद स्वस्थ होने वाले लोगों में इस संक्रमण के खिलाफ रोग प्रतिरोधक क्षमता संक्रमणमुक्त होने के छह महीने बाद तक और संभवत: इससे भी अधिक समय तक बनी रहती है। दो नए अध्ययनों में यह बात सामने आई है।

ये अध्ययन कोविड-19 रोधी टीकों के प्रभावी होने की उम्मीद को प्रबल करते हैं। ये टीके रोग प्रतिरोधी क्षमता को संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी बनाने में मदद करते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के निदेशक डॉ. नेड शार्पलेस ने कहा कि अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि संक्रमण के बाद जिन लोगों के शरीर में एंटीबॉडी मौजूद हैं, उनमें संक्रमण का खतरा काफी कम है, तथा यह सुरक्षा टीके से मिलने वाली सुरक्षा की तरह ही है। उन्होंने कहा कि दोबारा संक्रमित होने की आशंका ‘बहुत ही कम’ है।

इन अध्ययनों में दो तरीके के परीक्षण किए गए हैं। पहले अध्ययन में एंटीबॉडी के लिए रक्त की जांच की गई। दूसरे प्रकार की जांच में संक्रमण का पता लगाने के लिए नाक से लिए नमूनों या अन्य नमूनों का अध्ययन किया गया।

इनमें से एक अध्ययन के परिणाम ‘न्यू इंग्लैंड जरनल ऑफ मेडिसिन’ में बुधवार को प्रकाशित हुए और इसमें ब्रिटेन के ‘ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल्स’ के 12,500 से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों ने हिस्सा लिया।

अध्ययन में शामिल जिन 1,265 लोगों में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी थे, छह महीने बाद उनमें से केवल दो लोगों में संक्रमण पाया गया और उनमें भी संक्रमण के लक्षण नहीं थे, जबकि इसके विपरीत जिन 11,364 कर्मियों में शुरुआत में एंटीबॉडी नहीं थे, उनमें से 223 में संक्रमण पाया गया।

इसके अलावा राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के अध्ययन में 30 लाख से अधिक लोगों को शामिल किया गया, जिनकी अमेरिका की दो निजी प्रयोगशालाओं में एंटीबॉडी जांच की गई। इनमें से मात्र 0.3 प्रतिशत ऐसे लोग संक्रमित पाए गए, जिनमें पहले वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी थे, जबकि तीन प्रतिशत ऐसे लोग संक्रमित पाए गए, जिनमें एंटीबॉडी नहीं थे।