प्रतीकात्मक चित्र
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न्यूयॉर्क/भाषा। अमेरिकी फार्मा कंपनी फाइजर और यूरोपीय जैव प्रौद्योगिकी कंपनी बायोएनटेक एसई ने कोविड-19 के एक टीके का प्रायोगिक परीक्षण किया है जिसके नतीजे में टीके को सुरक्षित और मरीजों में एंटीबॉडी बनाने में सक्षम पाया गया। विशेषज्ञों द्वारा अध्ययन की समीक्षा किया जाना अभी बाकी है।

अध्ययन के अनुसार मरीजों को टीके की दो खुराक दिए जाने के बाद उनके भीतर बनने वाले एंटीबॉडी की संख्या उन मरीजों में पैदा हुए एंटीबाडी से अधिक पाई गई जिन्हें कोविड-19 से ठीक हो चुके लोगों का प्लाज्मा दिया गया था।

अध्ययन में भाग लेने वाले वैज्ञानिकों से अलग अमेरिका के बेयलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिक पीटर होटेज ने कहा, ‘मुझे खुशी है कि फाइजर ने परीक्षण के पहले चरण के आंकड़े साझा किए हैं। टीके की दो खुराक के बाद वायरस को निष्क्रिय करने वाले एंटीबॉडी की संख्या कॉनवालेसेन्ट एंटीबॉडी टाइटर से अधिक पाई गई है।’

अध्ययन में शामिल अमेरिका के न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि वे चार प्रायोगिक टीके का परीक्षण कर रहे हैं। अध्ययन में शामिल वैज्ञानिकों में से एक और फाइजर कंपनी की सीनियर वाइस प्रेजिडेंट तथा टीका अनुसंधान और विकास विभाग की प्रमुख कैथरीन यू जैनसन ने कहा, ‘हम जल्दी ही अपने परीक्षण के नतीजों को एक पीयर रिव्यू शोध पत्रिका में प्रकाशित करेंगे।’

बायोएनटेक के सह-संस्थापक और सीईओ और अध्ययन में शामिल वैज्ञानिक उगुर साहिन के अनुसार टीके के आरंभिक परीक्षण से प्राप्त आंकड़े उत्साहवर्धक हैं क्योंकि इनसे इस बात के संकेत मिले हैं कि बीएनटी162बी1 टीका मानव शरीर में विषाणु को निष्क्रिय करने वाले एंटीबॉडी उत्पन्न करने में सक्षम है।

फिजर की ओर से जारी एक वक्तव्य के अनुसार अध्ययन के शुरुआती हिस्से में 18 से 55 वर्ष की आयु के 45 स्वस्थ पुरुषों ने भाग लिया। अध्ययन में मरीजों पर टीके के कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं देखा गया। वक्तव्य के अनुसार दोनों कंपनियां टीके की खुराक तय करेंगी और बड़े स्तर पर परीक्षण करने की अनुमति मिलने के बाद 30 हजार लोगों पर टीके का अध्ययन किया जा सकता है।