उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

लखनऊ। कुंभ के लिए विख्यात इलाहाबाद का नाम अब आधिकारिक रूप से प्रयागराज हो गया है। मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। शहर का नाम बदलने की मांग कई वर्षों से हो रही थी। पिछले दिनों साधु-संतों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस आशय का प्रस्ताव भी दिया था, जिसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि शहर का नाम बदलकर प्रयागराज किया जाएगा। आखिर कैबिनेट ने इस पर मुहर लगा ही दी।

नाम परिवर्तन के इस फैसले का सोशल मीडिया पर काफी लोगों ने स्वागत किया है। चूंकि अगले साल कुंभ का आयोजन भी होगा। इससे पहले शहर का नाम बदल दिया गया है। जानकारी के अनुसार, इलाहाबाद का नाम प्रयागराज होने से विभिन्न संस्थाओं के नामों में भी परिवर्तन संभव है। उल्लेखनीय है कि हाल में योगी सरकार ने मुगलसराय स्टेशन का नाम बदलकर दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर कर दिया था। उसके बाद यह मांग और तेज हो गई थी कि इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किया जाए क्योंकि यह हिंदुओं की आस्था से जुड़ा है।

पुराणों में इस शहर का वर्णन प्रयागराज के नाम से मिलता है। जब भारत में मुगलों की हुकूमत कायम हुई तो अकबर के समय प्रयागराज का नाम बदलकर इलाहाबाद किया गया। ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार, अकबर ने ही 1574 के लगभग यहां किले की नींव रखी थी। मुगलों के दौर में विभिन्न दस्तावेजों में प्रयागराज का नाम इलाहाबाद लिखा जाने लगा। बाद में ब्रिटिश हुकूमत के दौर में भी यह नाम जारी रहा।

हालांकि कई बार लोगों ने इस बात की ओर संकेत किया था कि कुंभ नगरी का आधिकारिक नाम वही होना चाहिए जैसा कि हमारे प्राचीन शास्त्रों में मिलता है। योगी सरकार ने इस पर ध्यान दिया और इसका नाम आधिकारिक रूप से प्रयागराज हो गया। इस तरह अकबर के दौर में लिए गए फैसले को योगी आदित्यनाथ ने बदल दिया।

इस नाम परिवर्तन से कुछ संस्थाओं के नामों पर भी असर होगा। केंद्र की संस्थाओं के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। उसकी अनुमति के बाद उक्त संस्थाओं के नाम में भी प्रयागराज शब्द शामिल हो जाएगा।

इस तरह घूमा कालचक्र
पुराणों में प्रयागराज को सभी पापों का नाश करने वाला बताया गया है। मान्यता है कि ब्रह्माजी ने यहां प्रथम यज्ञ किया था। प्राचीन ग्रंथों में प्रयागराज के नाम से प्रसिद्ध यह शहर अब भी काफी लोगों द्वारा इसी नाम से संबोधित किया जाता था। इसे विभिन्न ऋषियों, महात्माओं की तपोभूमि होने के साथ ही महान स्वतंत्रता सेनानियों और साहित्यकारों की नगरी होने का गौरव प्राप्त है।

इलाहाबाद शब्द को मुगल बादशाह अकबर से जोड़ा जाता है। उसने किला बनवाया और बसावट कराई। इलाहाबाद का अर्थ है अल्लाह का शहर। ब्रिटिश हुकूमत में यह राजनीतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण रहा। कागजात में नाम इलाहाबाद ही चलता रहा। इस दौरान काफी लोगों के मन में यह इच्छा दबी रही कि कुंभ नगरी का नाम दोबारा प्रयागराज हो।

कहते हैं कि चीनी यात्री ह्वेन सांग ने भी इस नगर का वर्णन अपने यात्रा वृतांत में किया है। महान स्वतंत्रता सेनानी भारत रत्न महामना पं. मदनमोहन मालवीयजी ने भी यह मांग की थी कि आधिकारिक नाम प्रयागराज किया जाए। स्वतंत्रता के पश्चात कई राजनेताओं और प्रधानमंत्रियों तक से इस संबंध में मांग की गई। आखिरकार योगी आदित्यनाथ ने पहल की और कुंभ नगरी को उसका प्राचीन नाम मिल गया।

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