pm narendra modi
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को लालकिले पर तिरंगा फहराकर इतिहास रच दिया। अब तक भारत के प्रधानमंत्री सिर्फ 15 अगस्त को ही लालकिले पर तिरंगा फहराते रहे हैं। मोदी ने महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिंद सरकार की स्थापना के 75 साल पूरे होने पर इस विशेष कार्यक्रम में शिरकत की। तिरंगा फहराकर उन्होंने नेताजी सुभाष द्वारा हमारे देश की आज़ादी के लिए किए महान योगदान को याद किया।

समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नेताजी ने लालकिले पर तिरंगा फहराने का सपना देखा था। उन्होंने आज़ाद हिंद सरकार बनाई थी, वह अखंड भारत की सरकार थी। मोदी ने नेताजी के माता-पिता को भी नमन किया। उन्होंने आज़ादी की राह में कुर्बान हुए देश के सपूतों को याद किया।

महसूस की भारत मां की पीड़ा
प्रधानमंत्री मोदी ने नेताजी द्वारा देश की आज़ादी के लिए किए गए कार्यों को याद करते हुए कहा कि उनका सामना एक ताकतवर साम्राज्य से था, जिसका सूरज कभी अस्त नहीं होता था। मोदी ने नेताजी द्वारा 15-16 साल की उम्र में अपनी माता को लिखे गए पत्र का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने भारत माता की स्थिति पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा कि देश की गुलामी से नेताजी के मन में बहुत दुख था और वे आज़ादी की राह में काम करने के लिए तत्पर थे।

.. तो बेहतर होते हालात
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश में एक ही परिवार को बड़ा बनाने के लिए कई सपूतों के योगदान को भुला दिया गया। उन्होंने सरदार पटेल, डॉ. अंबेडकर और नेताजी के नामों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद के दशकों में अगर देश को नेताजी सुभाष और सरदार पटेल जैसे महापुरुषों का मार्गदर्शन मिलता, भारत को देखने के लिए विदेशी चश्मा न होता तो हालात काफी अलग होते।

प्रधानमंत्री मोदी ने नेताजी द्वारा आज़ादी के आंदोलन को आगे बढ़ाने लिए उठाए गए कदमों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आजादी के लिए संघर्ष करने वाले कई देशों ने नेताजी से प्रेरणा ली थी। उन्होंने कहा कि भारत आगे बढ़ा है, लेकिन नई ऊंचाइयों पर पहुंचना बाकी है। मोदी ने देश की आज़ादी में बलिदानियों को नमन करते हुए स्वराज और सुराज को रेखांकित किया।

संप्रभुता के मामले में दुगुनी ताकत से जवाब
प्रधानमंत्री मोदी ने सशस्त्र बलों की शक्ति का उल्लेख किया और देश को शांति का पक्षधर बताया। उन्होंने कहा कि भारत की सैन्य शक्ति आत्मरक्षा के लिए रही है और आगे भी रहेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें कभी किसी दूसरे की जमीन का लालच नहीं रहा, लेकिन भारत की संप्रभुता के लिए जो भी चुनौती बनेगा, उसे दुगुनी ताकत से जवाब मिलेगा। उन्होंने कहा कि सेना को आधुनिक बनाने पर पूरा जोर दिया जा रहा है। उन्होंने सरकार द्वारा सैन्यकर्मियों के हित में उठाए गए कदमों और वन रैंक वन पेंशन की मांग को पूरा करने का जिक्र किया।

नेताजी की नीतियों का अनुसरण
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि नेताजी के दिखाए रास्तों का मैंने अनुसरण किया। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर कहा कि नेताजी ने 75 साल पहले जो कार्य शुरू किया, उसे आगे बढ़ाने का काम सरकार ने किया है। बता दें कि इस साल प्रधानमंत्री ने दूसरी पर लालकिले पर तिरंगा फहराकर एक नई परंपरा शुरू कर दी है। कार्यक्रम में आज़ाद हिंद फौज के कुछ स्वतंत्रता सेनानी और बड़ी तादाद में आम लोग उपस्थित थे।

नारों से गूंजा आकाश
इस मौके पर ‘नेताजी अमर रहें’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे भी खूब लगे। अपने संबोधन के आखिर में मोदी ने वंदे मातरम् का नारा लगाया। उपस्थित लोगों ने भी भारत माता की जय-जयकार की जिससे आकाश गूंज उठा। उल्लेखनीय है कि नेताजी सुभाष ने 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में आज़ाद हिंद सरकार बनाई थी, जिसके बाद आज़ादी की जंग और तेज हो गई। उस महान घटना के 75 साल पूर्ण होने पर मोदी ने लालकिले पर तिरंगा फहराया और भारत मां के सपूत नेताजी सुभाष चंद्र बोस और अन्य जांबाजों को नमन किया। टीवी स्क्रीन के अलावा सोशल मीडिया पर लाखों लोगों ने मोदी का यह संबोधन सुना।