सांकेतिक चित्र
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नई दिल्ली। आर्थिक विकास का बढ़ता ग्राफ किसे अच्छा नहीं लगता! ऐसे दौर में जब वैश्विक एजेसियां आंकड़ों के आधार पर किसी देश की खुशहाली और बदहाली को माप रही हैं, तब बहुत कुछ ऐसा भी है जिसे नजरअंदाज करने की कीमत हम चुका रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं कि भारत तरक्की की राह में आगे बढ़ता जा रहा है और चीन उसे अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी मानता है, लेकिन चीन की एक भूल से हमने अब तक कोई ठोस सबक नहीं सीखा है।

आपने अक्सर चीन के कई शहरों खासतौर पर बीजिंग में वायु प्रदूषण को लेकर खबरें पढ़ी होंगी। वहां प्रदूषण की वजह से कई बार लोगों को खासी परेशानी हो चुकी है। वायु में मौजूद हानिकारक कण वातावतरण को धुंधला बना चुके हैं। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट हमारे लिए भी खतरे की घंटी से कम नहीं है।

इस रिपोर्ट पर गौर किया जाए तो पाएंगे कि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के देश भारत में दुनिया के 10 सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, पीएम स्तर 2.5 मानकर सर्वाधिक प्रदूषित शहरों की गणना की गई है। इसमें कानपुर शीर्ष पर है। कारखानों के लिए मशहूर हरियाणा के फरीदाबाद में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए ठोस कदम न उठाए गए तो यहां हालात चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। यह इस सूची में दूसरे स्थान पर है।

इसके अलावा सूची में बिहार का गया, उत्तर प्रदेश का वाराणसी और बिहार की राजधानी पटना को क्रमश: तीसरे, चौथे और पांचवे स्थान पर रखा गया है। इस सूची में देश की राजधानी दिल्ली छठे स्थान पर है। वहीं लखनऊ, आगरा और गुरुग्राम क्रमश: सातवें, आठवें और नौवें स्थान पर हैं। मुजफ्फरपुर दसवें स्थान पर है। पीएम स्तर 10 मानने पर दिल्ली को पहला स्थान मिला है। इसके बाद वाराणसी दूसरे स्थान पर है। आगरा और पटना क्रमश: पांचवे और छठे स्थान पर हैं। श्रीनगर नौवें स्थान पर है।

गत वर्ष दिल्ली में स्मॉग की वजह से लोगों को काफी दिक्कतें आईं। इससे उन लोगों को ज्यादा तकलीफों का सामना करना पड़ा जो दमा से पीड़ित हैं। अब तो दमा से पीड़ित लोग दीपावली और नए साल के आसपास ऐसे ठिकाने ढूंढ़ने लगे हैं जहां पटाखों का धुआं न पहुंचे। वायु प्रदूषण की वजह से कई लोग गंभीर बीमारियों से पीड़ित हो चुके हैं।

डॉक्टरों के पास फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित मरीजों की तादाद बढ़ती जा रही है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि उन मरीजों में काफी लोग ऐसे हैं जिन्होंने अपने जीवन में कभी धूम्रपान नहीं किया। इसके बावजूद उनके फेफड़ों में कैंसर इस हद तक फैल गया कि उन्हें इलाज के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगाना पड़ा। यह आज की तस्वीर है। अगर हम अब न संभले तो दस या बीस साल बाद यह इससे कहीं भयानक हो सकती है।

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