प्रधानमंत्री मोदी समारोह को संबोधित करते हुए।
प्रधानमंत्री मोदी समारोह को संबोधित करते हुए।

केवडिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को गुजरात के केवडिया में एक भव्य समारोह में सरदार पटेल की प्रतिमा का अनावरण किया। इस मौके पर उन्होंने देश की आज़ादी की लड़ाई और भारत को एकजुट करने में पटेल के योगदान का स्मरण किया। मोदी ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से देश की एकता और पटेल के सम्मान में नारे लगवाए। मोदी ने देशवासियों से आह्वान किया कि हम पटेल के मार्ग पर चलकर देश को सशक्त बनाएं।

इस मंच के जरिए मोदी ने सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। साथ ही इशारों में विपक्ष पर निशाना भी साध दिया। मोदी ने कहा कि आज उन सपूतों का सम्मान हो रहा है जिन्हें चाह कर भी इतिहास में भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि जब वे महापुरुषों की प्रशंसा करते हैं तो आलोचना होने लगती है। प्रतिमा राष्ट्र को समर्पित करते हुए प्रधानमंत्री ने इसे एक महत्वपूर्ण पल बताया। उन्होंने कहा कि देश की पहचान और सम्मान के लिए समर्पित पटेल के विराट व्यक्तित्व को आज सम्मान दिया जा रहा है, जिसके वे हकदार हैं। मोदी ने पटेल को स्वर्णिम पुरुष बताते हुए कहा कि वर्तमान ने भारतीय इतिहास को उजागर किया है।

मोदी ने बीते वर्षों को याद करते हुए कहा कि जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो इस प्रतिमा के निर्माण की परिकल्पना की थी। उस समय उन्हें अहसास भी नहीं था कि एक दिन प्रधानमंत्री के तौर पर इसे राष्ट्र को समर्पित करने का पुण्य कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि आज धरती से लेकर आसमान तक सरदार साहब का अभिषेक हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने लिए एक नया इतिहास रचा है। साथ ही इसे भविष्य की प्रेरणा का गगनचुंबी आधार भी बताया है।

इस मौके पर मोदी ने याद किया कि प्रतिमा के निर्माण के लिए किसानों से मिट्टी और खेती के काम में इस्तेमाल किए गए उपकरणों से लोहा ​मांगा गया। उन्होंने कहा कि उसी से इस प्रतिमा का मजबूत आधार तैयार हुआ है। उन्होंने प्रतिमा के बारे में कहा कि पहले वे एक ऐसी चट्टान ढूंढ़ रहे थे जिसे तराशकर सरदार पटेल की प्रतिमा बनाई जा सके, लेकिन वह नहीं मिली। उन्होंने कहा कि आज जन-जन ने इस विचार को शीर्ष पर पहुंचा दिया। विश्व की यह सबसे ऊंची प्रतिमा पूरी दुनिया और भावी पीढ़ी को पटेल के साहस की याद दिलाती रहेगी।

मोदी ने सरदार पटेल के महान व्यक्तित्व को याद करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसी साजिशों को विफल कर दिया जो भारत माता को खंड-खंड करना चाहती थीं। उस समय दुनिया में भारत को लेकर कई आशंकाएं थीं, लेकिन पटेल ने उन्हें नकार दिया। मोदी ने कहा कि वे लौह पुरुष सरदार पटेल को शत-शत नमन करते हैं। मोदी ने देश के एकीकरण की मुहिम में सरदार पटेल द्वारा रजवाड़ों को समर्पण के लिए तैयार कराने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तब मां भारती साढ़े पांच सौ से अधिक रियासतों में बंटी पड़ी थी। भारत को लेकर दुनिया में निराशा का माहौल था। निराशावादियों को लगता था कि भारत अपनी विविधता के कारण बिखर जाएगा। उस समय सरदार पटेल आशा की किरण थे।

मोदी ने कहा कि पटेलजी में कौटिल्य की कूटनीति और शिवाजी महाराज के शौर्य का समावेश था। उन्होंने सरदार पटेल द्वारा जुलाई 1947 के एक भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे आपसी झगड़े, वैर विदेशी आक्रांताओं के सामने हार की वजह बनते थे। ऐसे में यह गलती नहीं दोहरानी है और न ही दोबारा गुलाम होना है। मोदी ने कहा कि सरदार साहब ने संवाद से एकीकरण की शक्ति का उपयोग कर रजवाड़ों को विलय के लिए राजी कर लिया और उन्होंने भी त्याग की मिसाल कायम की।

मोदी ने कहा कि जिस कमजोरी पर दुनिया हमें उस समय ताना दे रही थी, पटेल ने उसे ही हमारी शक्ति बनाते हुए रास्ता दिखाया। उन्होंने देश की शक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि संशय में घिरा वह भारत आज दुनिया से अपनी शर्तों पर संवाद कर रहा है। उन्होंने भारत के तेजी से आर्थिक और सामरिक शक्ति बनने को रेखांकित किया। उन्होंने इसके लिए पटेल के योगदान को महत्वपूर्ण बताया जो साधारण किसान के घर में पैदा हुए असाधारण व्यक्तित्व के धनी थे।

मोदी ने कहा कि कच्छ से कोहिमा और करगिल से कन्याकुमारी तक देशवासियों के बेरोकटोक आवागमन के पीछे पटेल की अहम भूमिका है। अगर सरदार साहब का यह संकल्प न होता तो गिर के शेर, सोमनाथ के दर्शन और हैदराबाद की चारमीनार के लिए हिंदुस्तानियों को वीजा लेना पड़ता। उन्होंने सिविल सेवाओं में सुधार, महिलाओं को अधिकार दिलाने और लोकतंत्र को जन-जन से जोड़ने के लिए सरदार पटेल को याद किया। उन्होंने पटेल की प्रतिमा को किसानों के स्वाभिमान का प्रतीक बताया। उन्होंने इसे आदिवासियों के योगदान का स्मारक बताया। उन्होंने एक भारत, श्रेष्ठ भारत का उल्लेख करते हुए युवाओं से कहा कि यह विराट भारत की आकांक्षाओं को पूरा करने का मंत्र है।

मोदी ने इस प्रतिमा को देश की इंजीनियरिंग और तकनीकी सामर्थ्य का प्रतीक बताया। उन्होंने शिल्पकार राम वी. सुतार और प्रतिमा के कार्य से जुड़े लोगों के परिश्रम को सराहा। उन्होंने कहा कि जिस महापुरुष ने देश को एक करने के लिए इतना बड़ा पुरुषार्थ किया, उसे वह सम्मान जरूर मिलना चाहिए जिसका वह हकदार है। उन्होंने सहकारिता आंदोलन को पटेल की दिव्य दृष्टि का परिणाम बताया। मोदी ने भीमराव अंबेडकर, श्यामजी कृष्ण वर्मा, छोटूराम, गोविंद गुरु और नेताजी सुभाषचंद्र बोस जैसे महापुरुषों को याद कर सरकार द्वारा उनके सम्मान में बनाए गए स्मारकों और प्रयासों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हैरानी होती है जब देश में लोग इस मुहिम को राजनीतिक चश्मे से देखने का दुस्साहस करते हैं।

मोदी ने केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि इनके जरिए पटेल के सपनों को हकीकत में तब्दील करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने शौचालय निर्माण, स्वच्छता की मुहिम, गृह निर्माण, सड़क निर्माण, बिजली, ऑप्टिकल फाइबर और आयुष्मान भारत का उल्लेख कर कहा कि इनसे पटेल के विजन को जोड़ने की कोशिश की गई। प्रधानमंत्री ने सबका साथ, सबका विकास को समावेशी और सशक्त भारत का मंत्र बताया। संबोधन संपन्न होने के बाद करतल ध्वनि से प्रधानमंत्री का अभिनंदन किया गया। इस कार्यक्रम को टीवी और सोशल मीडिया के जरिए देश-विदेश में अनेक लोगों ने देखा।