heavy school bags
heavy school bags

नई दिल्ली। स्कूली बच्चों पर कम उम्र में ही बस्ते का भारी बोझ कई बार चर्चा में रहा है। अभिभावक, शिक्षाविद् और विभिन्न सामाजिक संगठन यह मांग करते रहे हैं कि यह बोझ कम किया जाए, ताकि मासूमों से उनका बचपन न छिने। अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस दिशा में अहम कदम उठाया है। उसकी ओर से पहली से लेकर दसवीं कक्षा तक के बच्चों के बस्ते का वजन तय कर दिया गया है।

इसके बाद उम्मीद जताई जा रही है कि इससे बच्चों की परेशानियां कम होंगी और उनका सहज ढंग से विकास होगा। अक्सर स्कूल जाते बच्चों की पीठ पर भारी-भरकम बस्ते लदे होते हैं। उन्हें उठाने और ढोने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस संबंध में कई शोध बताते हैं कि बस्ते के भारी बोझ से बच्चों को कमर दर्द जैसी समस्याएं कम उम्र में ही सताने लगती हैं। इसके अलावा अत्यधिक बोझ तनाव का कारण बन सकता है।

इसके अलावा होमवर्क भी एक अहम विषय रहा है। कम उम्र में ज्यादा होमवर्क की वजह से बच्चों का ज्यादातर समय होमवर्क करने में ही बीत जाता है। इससे वे खेल और मनोरंजन संबंधी गतिविधियों में ध्यान नहीं दे पाते। ज्यादा होमवर्क भी कई बार तनाव का कारण बन जाता है। जब कोई बच्चा होमवर्क नहीं कर पाता और उसे स्कूल में सजा का सामना करना पड़ता है तो इन सबका उसके मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है। अक्सर ऐसे बच्चे स्कूल जाने में आनाकानी करने लगते हैं।

यह होगा बस्ते का वजन
पहली से दूसरी कक्षा: बस्ते का वजन 1.5 किग्रा तक
तीसरी से पांचवी कक्षा: बस्ते का वजन 2 से 3 किग्रा तक
छठी और सातवीं कक्षा: बस्ते का वजन 4 किग्रा तक
आठवीं और नौवीं कक्षा: बस्ते का वजन 4.5 किग्रा तक
दसवीं कक्षा: बस्ते का वजन 5 किग्रा तक

होमवर्क के लिए नियम
निर्देशानुसार, पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों को होमवर्क नहीं दिया जाएगा। उन्हें भाषा और गणित जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। वहीं तीसरी से पांचवी तक भाषा, ईवीएस और गणित जैसे विषय एनसीईआरटी पाठ्यक्रमानुसार पढ़ाए जाएंगे। बच्चों से ऐसी कोई सामग्री मंगवाने की मनाही की गई है जिससे उनका बस्ता भारी हो सकता है। मंत्रालय के इस फैसले पर अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने खुशी जताई है।