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तिरंगे से लेकर स्वराज और मोटे अनाज तक ... ‘मन की बात’ में यह बोले मोदी
असम के बोंगई गांव में एक दिलचस्प परियोजना चलाई जा रही है, वो है - प्रोजेक्ट संपूर्णा
 
पहाड़ों की जीवनशैली और संस्कृति से हमें पहला पाठ तो यही मिलता है कि हम परिस्थितियों के दबाव में न आएं तो आसानी से उन पर विजय भी प्राप्त कर सकते हैं

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देशवासियों के साथ अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि अगस्त के इस महीने में, आप सभी के पत्रों, संदेशों और कार्ड ने, मेरे कार्यालय को तिरंगामय कर दिया है। मुझे ऐसा शायद ही कोई पत्र मिला हो, जिस पर तिरंगा न हो, या तिरंगे और आज़ादी से जुड़ी बात न हो।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अमृत महोत्सव और स्वतंत्रता दिवस के इस विशेष अवसर पर हमने देश की सामूहिक शक्ति के दर्शन किए हैं, एक चेतना की अनुभूति हुई है। इतना बड़ा देश, इतनी विविधताएं, लेकिन जब बात तिरंगा फहराने की आई, तो हर कोई, एक ही भावना में बहता दिखाई दिया।

अमृत महोत्सव के ये रंग केवल भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के दूसरे देशों में भी देखने को मिले। बोत्स्वाना में वहां के रहने वाले स्थानीय गायक ने भारत की आजादी के 75 साल मनाने के लिए देशभक्ति के 75 गीत गाए।

आजादी के आंदोलन में हिस्सा लेने वाले अनसुने नायक-नायिकाओं की कहानी है ‘स्वराज’। दूरदर्शन पर हर रविवार ‘स्वराज’ का रात 9 बजे प्रसारण होगा, जो 75 सप्ताह तक चलने वाला है। मेरा आग्रह है कि आप इसे खुद भी देखें और अपने बच्चों को भी जरूर दिखाएं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि असम के बोंगई गांव में एक दिलचस्प परियोजना चलाई जा रही है, वो है - प्रोजेक्ट संपूर्णा। इस प्रोजेक्ट का मकसद है कुपोषण के खिलाफ लड़ाई और इस लड़ाई का तरीका भी बहुत यूनिक है। यूनाइटेड नेशन्स ने एक प्रस्ताव पारित कर वर्ष 2023 को इंटरनेशनल इयर ऑफ मिलेट्स घोषित किया है। आपको यह जानकर भी बहुत खुशी होगी कि भारत के इस प्रस्ताव को 70 से ज्यादा देशों का समर्थन मिला था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनियाभर में इसी मोटे अनाज का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। मिलेट्स, मोटे अनाज, प्राचीन काल से ही हमारे एग्रीकल्चर, कल्चर, सिविलाइजेशनन का हिस्सा रहे हैं। हमारे वेदों में मिलेट्स का उल्लेख मिलता है, और इसी तरह, पुराणनुरू और तोल्काप्पियम में भी इसके बारे में, बताया गया है।

भारत विश्व में मिलेट्स का सबसे बड़ा उत्पादक देश है, इसलिए इस पहल को सफल बनाने की बड़ी जिम्मेदारी भी हम भारतवासियों के कंधे पर ही है। हम सबको मिलकर इसे जन-आंदोलन बनाना है, और देश के लोगों में मिलेट्स के प्रति जागरूकता भी बढ़ानी है।

मेरा अपने किसान भाई-बहनों से, यही आग्रह है कि मिलेट्स यानी मोटे अनाज को अधिक-से-अधिक अपनाएं और इसका फायदा उठाएं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ दिन पहले मैंने अरुणाचल प्रदेश के सियांग जिले में जोरसिंग गांव की एक खबर देखी। यह खबर एक ऐसे बदलाव के बारे में थी, जिसका इंतजार इस गांव के लोगों को, कई वर्षों से था। दरअसल, जोरसिंग गांव में इसी महीने, स्वतंत्रता दिवस के दिन से 4जी इंटरनेट की सेवाएं शुरू हो गई हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पहाड़ों पर रहने वाले लोगों के जीवन से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। पहाड़ों की जीवनशैली और संस्कृति से हमें पहला पाठ तो यही मिलता है कि हम परिस्थितियों के दबाव में न आएं तो आसानी से उन पर विजय भी प्राप्त कर सकते हैं, और दूसरा, हम कैसे स्थानीय संसाधनों से आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

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