लाउडस्पीकर पर अज़ान: इलाहाबाद ​उच्च न्यायालय के आदेश का सख्ती से पालन कराने का निर्देश

प्रतीकात्मक चित्र। स्रोत: PixaBay
प्रतीकात्मक चित्र। स्रोत: PixaBay

प्रयागराज/दक्षिण भारत। सुबह लाउडस्पीकर पर अज़ान से नींद बाधित होने संबंधी शिकायत के संबंध में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव द्वारा प्रशासन को पत्र लिखे जाने के बाद इस पर कार्रवाई की गई है।

कुलपति ने जिलाधिकारी को पत्र लिखा था। इस पर प्रयागराज रेंज के पुलिस महानिरीक्षक ने चार जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों/ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले का सख्ती से पालन कराएं।

आईजी केपी सिंह ने प्रयागराज, फतेहपुर, कौशांबी और प्रतापगढ़ के जिलाधिकारियों और पुलिस प्रमुखों को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कुलपति के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश का पालन होना चाहिए।

आईजी ने पत्र में उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लेख करते हुए लिखा कि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना किसी भी धार्मिक स्थल अथवा सार्वजनिक स्थल पर लाउडस्पीकर या लोक संबोधन प्रणाली का उपयोग किया जाना प्रतिबंधित और अवैध है।

बता दें कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने यह आदेश मई 2020 में दिया था, जो देशभर में चर्चित हुआ था। न्यायालय ने अज़ान को इस्लाम का आवश्यक एवं अभिन्न हिस्सा माना, लेकिन लाउडस्पीकर या ऐसे उपकरण जिनसे आवाज बढ़ाई जा सकती हो, को धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं माना। इसके साथ ही यह आदेश दिया कि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच लाउडस्पीकर के उपयोग की अनुमति नहीं दी जा सकती।

इलाहाबाद विवि की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने 3 मार्च को जिलाधिकारी को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि घर के पास मस्जिद से मौलवी द्वारा सुबह लाउडस्पीकर पर अज़ान दी जाती है। इससे नींद बाधित होती है और दिनभर सिर में दर्द रहता है।

हालांकि मामले के सोशल मीडिया में आने के बाद मौलवी द्वारा लाउडस्पीकर की दिशा बदलने और आवाज कम करने के समाचार हैं।