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संविधान व लोकतंत्र के प्रति आस्था रखने वालों के लिए चिंता का विषय हैं पारिवारिक पार्टियां: मोदी
'अच्छा होता अगर देश के आजाद होने के बाद कर्तव्य पर बल दिया गया होता'
 
'संविधान की एक-एक धारा को भी चोट पहुंची है, जब राजनीतिक दल अपने आप में अपना लोकतांत्रिक चरित्र खो देते हैं'

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को संसद के केंद्रीय कक्ष में संविधान दिवस पर आयोजित समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसे संकट की ओर बढ़ रहा है, जो संविधान को समर्पित लोगों के लिए चिंता का विषय है, लोकतंत्र के प्रति आस्था रखने वालों के लिए चिंता का विषय है और वो है पारिवारिक पार्टियां।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब सदन में इस विषय पर मैं 2015 में बोल रहा था, बाबा साहेब अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर इस कार्य की घोषणा करते समय तब भी विरोध आज नहीं हो रहा है उस दिन भी हुआ था कि 26 नवंबर कहां से ले आए, क्यों कर रहे हो, क्या जरूरत थी?

प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान की भावना को भी चोट पहुंची है, संविधान की एक-एक धारा को भी चोट पहुंची है, जब राजनीतिक दल अपने आप में अपना लोकतांत्रिक चरित्र खो देते हैं। जो दल स्वयं लोकतांत्रिक चरित्र खो चुके हों, वे लोकतंत्र की रक्षा कैसे कर सकते हैं?

प्रधानमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी ने आजादी के आंदोलन में आधिकारों को लिए लड़ते हुए भी, कर्तव्यों के लिए तैयार करने की कोशिश की थी। अच्छा होता अगर देश के आजाद होने के बाद कर्तव्य पर बल दिया गया होता।

प्रधानमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी ने जो कर्तव्य के बीज बोए थे, आजादी के बाद वो वट वृक्ष बन जाने चाहिए थे। लेकिन दुर्भाग्य से शासन व्यवस्था ऐसी बनी कि उसने अधिकार, अधिकार की बात करके लोगों को एक अवस्था में रखा कि 'हम हैं तो आपके अधिकार पूरे होंगे'।

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