प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। कोरोना काल में अर्थव्यवस्था को ताकत देने के लिए मोदी सरकार ने गुरुवार को एक और राहत पैकेज का ऐलान किया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि अर्थव्यवस्था में सुधार हो रहा है। उन्होंने ‘आत्मनिर्भर भारत 3.0’ की घोषणा करते हुए बताया कि रोजगार के अवसर पैद करने के लिए ‘आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना’ की शुरुआत की गई है।

वित्त मंत्री ने बताया कि आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना अधिकाधिक संख्या में कर्मचारियों को ईपीएफओ से जोड़ने और पीएफ का लाभ देने की योजना है। इसका लाभ उन कर्मचारियों को मिलेगा जो पूर्व में पीएफ के लिए रजिस्टर्ड नहीं थे और जिनका वेतन 15 हजार रुपए से कम है। इसके अलावा, जिनके पास अगस्त से सितंबर तक कोई नौकरी नहीं थी लेकिन बाद में वे पीएफ से जुड़ गए तो वे भी इस योजना का लाभ लेने के पात्र होंगे। यह योजना 30 जून, 2021 तक लागू रहेगी।

साथ ही, सरकार दो साल तक एक हजार कर्मचारियों वाली संस्थाओं में नए भर्ती होने वाले कर्मचारियों के पीएफ का 24 प्रतिशत हिस्सा बतौर सब्सिडी देगी। इससे कंपनियां लोगों को रोजगार देने के लिए प्रोत्साहित होंगी और उन पर पड़ने वाला आर्थिक भार भी कम होगा। इसे अक्टूबर की पहली तारीख से लागू किया जाएगा। वहीं, जहां कर्मचारियों की संख्या एक हजार से ज्यादा है, वहां नए कर्मचारी भर्ती होने पर दो साल तक पीएफ का 12 प्रतिशत सरकार द्वारा दिया जाएगा।

वित्त मंत्री ने आर्थिक मोर्चे से आए हालिया सकारात्मक संकेतों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न आंकड़े सुधार के संकेत दे रहे हैं और जीएसटी संग्रह भी बेहतर हुआ है। आरबीआई के संकेतों के अनुसार, तीसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था जीडीपी को लेकर सकारात्मक वृद्धि दर प्राप्त कर सकती है। वित्त मंत्री द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सरकार ने इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ईसीएलजीएस) की अवधि में बढ़ोतरी कर इसे 31 मार्च 2021 कर दिया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि मजदूरों को आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत उठाए कदमों से लाभ हुआ। बैंकों द्वारा किसानों को जारी किए गए किसान क्रेडिट कार्ड की संख्या 157.44 लाख तक पहुंच गई है। इसके अलावा, दो चरणों में 1,43,262 करोड़ रुपए आवंटित हो चुके हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा के अंतर्गत भी 1,681 करोड़ रुपए भेजे जा चुके हैं।