सारंगी बजाते हुए साबिर खान
सारंगी बजाते हुए साबिर खान

जयपुर/दक्षिण भारत। शास्त्रीय संगीत की दुनिया में सारंगी के सुल्तान कहे जाने वाले उस्ताद सुल्तान खान को कौन नहीं जानता! करोड़ों दिलों में राज करने वाले पद्मभूषण उस्ताद सुल्तान खान ने सारंगी के बल पर फ़िल्म इंडस्ट्री में अरसे तक अपनी बादशाहत का लोहा मनवाया। आज उनके पुत्र उस्ताद साबिर खान अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। सीकर घराने से ताल्लुक रखने वाले साबिर 9वीं पीढ़ी के सारंगी वादक हैं।

◆ जन्म समृद्ध संगीत घराने में…
उनका जन्म राजस्थान के जोधपुर में हुआ। उनके अब्बा सुल्तान खान के अलावा उनके दादा उस्ताद गुलाब खान, नाना उस्ताद महबूब खान और उस्ताद मुनीर खान भी सारंगी नवाज़ रहे हैं।

◆ मां के पेट से ही संगीत से जुड़ाव…
जब साबिर अपनी मां के पेट में थे, तबसे उनकी संगीत तालीम शुरू हो गई थी। सारंगी की धुनों को सुनते हुए ही वे बड़े हुए। बच्चों के बचपन अक्सर खिलौनों के बीच गुज़रते हैं लेकिन उनका बचपन साज़ और आवाज़ के बीच गुज़रा। बातचीत के दौरान साबिर बताते हैं,“मेरे जन्म पर कान में अज़ान देने की रस्म के बाद मेरे दादा ने मुझे संगीत की कुछ रागें सुनाईं। मेरी संगीत की तालीम उसी दिन शुरू हो गई। अब तो सफ़र जारी है।”

बचपन में उनके दोस्त भी संगीत रसिक और संगीत से मुहब्बत करने वाले थे। दोस्तों के बीच खेलकूद भी संगीत से जुड़े होते थे। कौन कितनी रागें, कितनी तालें सुनाएगा, इस बात को लेकर शर्तें लगती थीं।

◆ जोधपुर में ही पहली बार अब्बा को मंच पर देखा…
उन्होंने अपने अब्बा सुल्तान खान को पहली बार जोधपुर के ही टाउन हॉल में प्रस्तुति देते देखा, तब वे 6 साल के थे। उस दिन उनके अब्बा ने तबले के जादूगर उस्ताद ज़ाकिर हुसैन के साथ संगत की थी।

◆ 13 की उम्र में दी पहली प्रस्तुति…
जिस प्रकार बड़े फ़िल्म कलाकार अपने बच्चों को फिल्मों में लांच करते हैं, ठीक उसी तरह उस्ताद सुल्तान खान ने भी अपने बेटे साबिर को उस्ताद ज़ाकिर हुसैन के साथ 13 साल की उम्र में लांच किया।

नीता अंबानी के साथ साबिर खान
नीता अंबानी के साथ साबिर खान

◆ अब्बा की नसीहतों पर चल रहे हैं…
बातचीत के दौरान साबिर बताते हैं,“कॉन्सर्ट के बाद उनके अब्बा ने कहा, हमें लंबी रेस का घोड़ा बनना है, पानी के बुलबुले नहीं! लंबी रेस का घोड़ा बनने के लिए 2 घण्टे का आर्टिस्ट और 22 घण्टे का अच्छा इंसान बनना पड़ेगा! इस जन्म में प्यार करो, गाना बजाना अगले जन्म में करना!”

◆ फिल्मी दुनिया के दिग्गजों की मौजूदगी में पहली प्रस्तुति…
वे रब का शुक्रिया अदा करते हैं कि उसने उनके पहले लाइव कॉन्सर्ट में उनके लिए एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी ऑडियंस मौजूद रही। अपने अब्बा और उस्ताद ज़ाकिर हुसैन के साथ मंच पर धूम मचा देने वाले साबिर की पहली लाइव परफॉर्मेंस में लता मंगेशकर, दिलीप कुमार, प्यारेलाल, अन्नू मलिक, साजिद-वाजिद, इस्माइल दरबार, श्रेया घोषाल, राजपाल यादव जैसे दिग्गज फिल्मी सितारे मौजूद थे।

◆ 300 फिल्मों में दिया म्यूजिक…
13 साल की उम्र से संगीत की दुनिया में बतौर कलाकार क़दम रखने वाले साबिर आज बॉलीवुड की 300 फिल्मों में संगीत दे चुके हैं। पहली फ़िल्म करीना कपूर अभिनीत ‛चमेली’ थी जिसमें मन सात समंदर डोल गया गीत के लिए उन्होंने सारंगी बजाई थी। तब से अब तक वे बदलापुर, जोधा अकबर, डोर, बचना ए हसीनों, दंगल जैसी कई बड़ी फिल्मों में संगीत का जादू बिखेर चुके हैं। साबिर ने लता मंगेशकर, आशा भोंसले और आबिदा परवीन जैसी वर्ल्ड क्लास म्यूजिक लेजेंड्स के साथ भी गैर फिल्मी एलबम किए हैं। अब वे बॉलीवुड में बतौर म्यूजिक कंपोजर भी एंट्री कर चुके हैं। बतौर म्यूजिक कंपोजर उनके ‛द डार्क साइड ऑफ लाइफ: मुंबई सिटी’ फ़िल्म के साथ ही ‛गुस्ताखियां’ एलबम आ चुका है।

अपने अब्बा के अलावा वे उस्ताद ज़ाकिर हुसैन, लता मंगेशकर, आशा भोंसले, गुलाम अली, सलीम सुलेमान, विशाल भारद्वाज, तलत अज़ीज़ और विश्व संगीत के चोटी के कलाकारों के साथ काम कर चुके हैं।

प्रस्तुति: मोईनुद्दीन चिश्ती
(देश के वरिष्ठ लेखक- पत्रकार हैं)
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