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पंचतत्व में विलीन हुए कल्याण सिंह
 
पंचतत्व में विलीन हुए कल्याण सिंह
स्व. कल्याण सिंह को नमन करते लोग। फोटो स्रोत: भाजपा ट्विटर अकाउंट।

अलीगढ़/लखनऊ/भाषा। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान तथा हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह के पार्थिव शरीर का सोमवार को बुलंदशहर जिले के नरौरा में गंगा नदी के तट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। कल्याण सिंह के पुत्र और एटा से भाजपा सांसद राजवीर सिंह ने ‘जय श्री राम’ और ‘कल्याण सिंह अमर रहे’ के नारों के बीच मुखाग्नि दी। कल्याण सिंह के पौत्र राज्यमंत्री संदीप सिंह भी मुखाग्नि प्रक्रिया में शामिल हुए।

कल्‍याण सिंह का पार्थिव शरीर दोपहर बाद अलीगढ़ के अतरौली स्थित लोक निर्माण विभाग के अतिथि गृह से एक लंबे काफिले के साथ नरौरा पहुंचा। इसके पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को अलीगढ़ के अतरौली पहुंचकर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शुमार किए जाने वाले कल्याण सिंह के अंतिम दर्शन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनके निधन से दबे, कुचले और पिछड़ों ने अपना एक हितचिंतक गंवाया है।

नरौरा घाट पर देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तराखंड के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन कौशिक और केंद्रीय राज्य मंत्री अजय भट्ट समेत उत्तराखंड के कई प्रमुख नेताओं ने कल्याण सिंह को श्रद्धा सुमन अर्पित कर अंतिम विदाई दी। उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य समेत राज्य के कई प्रमुख नेता शव यात्रा के साथ लगातार बने रहे।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की ओर से राजनाथ सिंह, उपराष्ट्रपति की ओर से स्मृति ईरानी और प्रदेश की राज्यपाल की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुष्प चक्र अर्पित किया। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह का शनिवार की रात सवा नौ बजे लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई में निधन हो गया था। वह 89 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से बीमार थे।

इसके पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज अलीगढ़ के अतरौली स्थित लोक निर्माण विभाग के अतिथि गृह में पहुंचे जहां कल्याण का पार्थिव शरीर रखा गया था। शाह ने उनके अंतिम दर्शन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कल्‍याण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शाह ने कहा, ‘आज मैं कल्‍याण सिंह के अंतिम दर्शन के लिए आया हूं। कल्‍याण सिंह का इस दुनिया से जाना भाजपा के लिए बहुत बड़ी क्षति है।’

उन्होंने कहा, ‘उनके (कल्याण) जाने के साथ ही भाजपा ने अपना एक दिग्गज और हमेशा संघर्षरत रहने वाला नेता खोया है। देश भर के दबे कुचले और पिछड़ों तथा विशेषकर उत्तर प्रदेश के दबे कुचले पिछड़ों ने अपना एक हित चिंतक गंवाया है।’ केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, ‘राम जन्मभूमि आंदोलन के कल्‍याण सिंह बड़े नेता रहे और राम जन्मभूमि आंदोलन के लिए सत्ता त्‍याग करने में तनिक भर भी उन्होंने नहीं सोचा।’

पुरानी स्मृतियों को ताजा करते हुए शाह ने कहा, ‘जब राम जन्मभूमि का शिलान्यास हुआ तो उसी दिन बाबूजी से बात हुई तो बड़े हर्ष और संतोष से उन्होंने बताया कि आज मेरे जीवन का लक्ष्य पूरा हुआ। उनका पूरा जीवन विकास और उप्र के लोगों को लिए समर्पित रहा। उत्तर प्रदेश को अच्‍छा प्रदेश बनाने के लिए वह कार्यरत रहे।’ उन्होंने कहा कि गरीब तबके से उठकर इतना बड़ा नेता बनना, विचारधारा के लिए संघर्ष करना, समाज के लिए समर्पित रहना, यह सब हम सब भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा की चीजें रहेंगी।

उन्होंने कहा, ‘भाजपा के अंदर एक बड़ी रिक्तता बन गई है और इसे भर पाना लंबे समय तक मुश्किल होगा।’ शाह ने कहा, ‘काफी समय से सक्रिय राजनीति में न रहते हुए भी जिस प्रकार जनसैलाब बाबूजी को श्रद्धांजलि देने आया, विशेषकर युवाओं को देख रहा हूं, वह यही साबित करता है कि उप्र के सार्वजनिक जीवन पर उन्होंने एक गहरी छाप छोड़ी है। हम हृदय से गहरी श्रद्धांजलि देते हैं और वादा करते हैं गरीबों, पिछड़ों और दबे कुचलों के लिए संघर्षरत रहेंगे, इतना ही कह सकता हूं।’

मध्‍यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी श्रद्धांजलि में कहा, ‘कल्‍याण सिंह व्यक्ति नहीं, एक संस्था थे, एक आंदोलन थे। उनके दिमाग में गरीब, किसान, पिछड़े और शोषित के कल्याण की भावना थी। वह केवल उनके नेतृत्व में ही नहीं, उनकी कविताओं में भी प्रदर्शित होती थी। उन्होंने क्रांति का शंखनाद किया था।’ चौहान ने कल्‍याण सिंह की एक कविता भी सुनाई और कहा कि सामान्य परिवार में जन्म लेकर उप्र के मुख्यमंत्री तक का सफर और अयोध्या में भव्य मंदिर के निर्माण का संकल्प उनके बिना पूरा नहीं हो सकता था।

उन्होंने मध्य प्रदेश की साढ़े आठ करोड़ जनता की ओर से कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह ने कहा कि राजनीति में ऐसे सच्चे नेता विरले होते हैं, जिन्हें जनसमर्थन प्राप्त होता है और उनके प्रति सच्ची श्रद्धा होती है। इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह भी मौजूद थे।

इससे पहले राज्य के अधिकारियों ने बताया था कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का अंतिम संस्कार सोमवार को प्रदेश के बुलंदशहर जिले के राजघाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। अधिकारियों ने यहां बताया कि सिंह का पार्थिव शरीर आज सुबह साढ़े नौ बजे अलीगढ़ के अहिल्‍याबाई होल्‍कर स्टेडियम से उनके पैतृक गाँव मढौली के लिए ले जाया गया जहां उनके अंतिम दर्शन के बाद उन्हें बुलंदशहर के राजघाट ले जाया जाएगा।

सिंह की अंतिम यात्रा अलीगढ़ के अहिल्याबाई स्टेडियम से सुबह निकली और करीब 17 किलोमीटर की दूरी तय कर अतरौली के लोक निर्माण विभाग के अतिथि गृह में पहुंची। अतिथि गृह में उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। वहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी।

इस मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह भी मौजूद रहे। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश के कई प्रमुख नेताओं ने रविवार को लखनऊ पहुंचकर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के अंतिम दर्शन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए विधान भवन और प्रदेश भाजपा कार्यालय में भी रखा गया था।

गौरतलब है कि कल्याण सिंह राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शुमार थे और छह दिसंबर 1992 को अयोध्या स्थित विवादित ढांचा गिराये जाने के वक्त उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। इस घटना के बाद सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। सिंह को पिछली चार जुलाई को संक्रमण तथा स्वास्थ्य संबंधी कुछ अन्य समस्याएं होने पर एसजीपीजीआई के गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती कराया गया था। उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था और शनिवार रात उनका निधन हो गया।

पिछले साल सितंबर में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के साथ वह विध्वंस के मामले में बरी किए गए जिसमें उनके समेत 32 अन्‍य लोगों पर ढांचा ध्‍वंस का आरोप था। उन्होंने 1990 के दशक में उत्तर प्रदेश में भाजपा को सत्ता में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।