‘रिपब्लिक टीवी’ के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी
‘रिपब्लिक टीवी’ के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी

दो साल पुराने मामले में गिरफ्तारी, सोशल मीडिया बोला- यह प्रेस की आज़ादी पर हमला

मुंबई/दक्षिण भारत। ‘रिपब्लिक टीवी’ के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी को मुंबई पुलिस ने बुधवार सुबह गिरफ्तार कर लिया। बताया गया कि यह गिरफ्तारी एक आर्किटेक्ट को कथित रूप से आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में की गई है, जो दो साल पुराना है।

इस संबंध में पुलिस ने बताया कि अर्नब को लोअर परेल स्थित घर से अलीबाग पुलिस टीम ने गिरफ्तार किया। सोशल मीडिया पर आए वीडियो और तस्वीरों में देखा गया कि अर्नब को कुछ पुलिसकर्मी धकेलते हुए वैन में बैठाते हैं।

वहीं, सोशल मीडिया पर अर्नब के प्रशंसकों ने इसे महाराष्ट्र सरकार द्वारा ‘बदला’ लेने की कार्रवाई और पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया।

बता दें कि अलीबाग पुलिस ने अर्नब गोस्वामी को धारा 306 और 34 के तहत गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि उसके पास सबूत मौजूद हैं। पुलिस के अनुसार, साल 2018 में एक आर्किटेक्ट और उनकी मां ने आत्महत्या कर ली थी, जिसका कथित तौर पर संबंध अर्नब गोस्वामी के रिपब्लिक टीवी द्वारा बकाया रकम न चुकाने से है।

बता दें कि इस साल मई में महाराष्ट्र सरकार ने आर्किटेक्ट अन्वय नाइक की बेटी आज्ञा नाइक द्वारा की गई नई शिकायत के बाद दोबारा जांच के आदेश दिए थे। आज्ञा के आरोपों के अनुसार, पूर्व में अलीबाग पुलिस ने मामले में ठीक से जांच नहीं की थी।

जब अर्नब को पुलिसकर्मी अपने साथ ले जाने आए तो उनमें मामूली हाथापाई की बातें भी वीडियो में सामने आई हैं। वहीं, पुलिस वैन में बैठे अर्नब द्वारा यह दावा किया गया कि उनके और उनके बेटे के साथ गलत बर्ताव किया गया।

पुलिस के दावे के अनुसार, ‘कॉनकॉर्ड डिज़ाइन्स प्राइवेट लिमिटेड’ के मालिक अन्वय नाइक ने अपने ‘सुसाइड नोट’ में यह लिखा था कि अर्नब गोस्वामी, ‘आईकास्टएक्स/स्कीमीडिया’ के फिरोज शेख और ‘स्मार्ट वर्क्स’ के नीतीश सारदा ने उनके बकाए का भुगतान नहीं किया, ऐसे में वे आत्महत्या जैसा कदम उठा रहे हैं।

पुलिस के अनुसार, अर्नब के अलावा जिन दो लोगों के नामों का जिक्र किया गया है, उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया है। उक्त तीनों कंपनियों पर 83 लाख, चार करोड़ और 55 लाख रुपए का बकाया था। हालांकि, ‘रिपब्लिक टीवी’ ने इन दावों को खारिज किय है। उसने कहा है कि ‘कॉनकॉर्ड’ को पूरी रकम चुका दी गई थी।

मामले पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी टिप्पणी की है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने एक बार फिर लोकतंत्र को कलंकित किया है। रिपब्लिक टीवी और अर्नब गोस्वामी के खिलाफ सत्ता का खुल्लम-खुल्ला दुरुपयोग, व्यक्तिगत आजादी और लोकतंत्र के चौथे खम्भे पर हमला है।’ उन्होंने कहा, ‘यह घटना आपातकाल की याद दिलाती है। प्रेस की आजादी पर इस हमले का विरोध जरूर होना चाहिए और विरोध किया जाएगा।’

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, ‘प्रत्येक व्यक्ति जो प्रेस की आजादी और अभिव्यक्ति की आजादी में विश्वास करता है, वह महाराष्ट्र सरकार की दादागिरी और अर्नब गोस्वामी को प्रताड़ित करने से गुस्से में है। सोनिया और राहुल गांधी द्वारा निर्देशित, असहमति जताने वालों की आवाज दबाने का यह एक और उदाहरण है। शर्मनाक!’

सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, ‘महाराष्ट्र में प्रेस की स्वतंत्रता पर हमले की हम निंदा करते हैं। प्रेस के साथ पेश आने का यह तरीका नहीं है। इससे आपातकाल के दिनों की याद आती है, जब प्रेस के साथ इस प्रकार का व्यवहार किया जाता था।’

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा, ‘स्वतंत्र प्रेस के पैरोकार लोग अगर आज अर्नब के समर्थन में खड़े नहीं होते हैं, तो वे रणनीतिक रूप से फासीवाद के समर्थन में हैं। आप भले ही उन्हें पसंद नहीं करते हों, आप उनको चाहे मान्यता नहीं देते हों, भले ही आप उनकी उपस्थिति को नजरअंदाज करते हों लेकिन अगर आप चुप रहे तो आप दमन का समर्थन करते हैं। अगर अगले शिकार आप होंगे, तो फिर कौन बोलेगा?’

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, ‘सांप्रदायिक हिंसा भड़काने की कोशिश करने वालों का साथ दे रही कांग्रेस पार्टी की हर साज़िश का भंडाफोड़ करने की सजा अर्नब गोस्वामी को चुकानी पड़ रही है। टुकड़े-टुकड़े गैंग हो या पालघर के हत्यारे, इनको शरण देने वाले कौन हैं? इसका जवाब सोनियाजी और राहुल गांधी से देश मांग रहा है।’