आपने  अक्सर कहीं लोगों से या फिर अपने ही घर के बुजुर्गो से ये कहते हुए सुना होगा कि रात को शमशान नहीं जाना चाहिए, इसके पीछे का कारण पूछने पर घर वाले बताते हैं कि वहां भूत-प्रेत का साया होता हैं, लेकिन आज हम आपको हम इसके पीछे का सहीं कारण बताने जा रहे हैं, इसके पीछें का अंधविश्वास मानते हैं, जबकि कुछ लोग इसे एक मनोवैज्ञानिक समस्या मानते हैं, आध्यात्म विज्ञान के जानकारों के अनुसार श्मशान अथवा कब्रिस्तान ऐसे स्थान हैं जो नकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण होते हैं। असल समस्या इसी नकारात्मक ऊर्जा के कारण आती है।श्मशान में अंतिम संस्कार करने आए लोग अपने प्रियजनों का दुख और शोक में विलाप करते हैं, जो कि यहां के माहौल को नकारात्मक बना देती है। लंबे समय तक ऐसा होते रहने से यह ऊर्जा प्रचंड मात्रा में इक हो जाती है। जिनकी मानसिक शक्ति प्रबल हैं या जिन लोगों की प्रबल इच्छाशक्ति है, उन पर ऐसी चीजों का असर कम होता है। कोई व्यक्ति नेगेटिव थिंकिंग रखता हैं तो इन शक्तियों का उस पर बहुत ज्यादा असर होता हैं और वो इनके वश में हो जाता है। रात को वहीं दिमाग भी एकाग्र होता हैं और नकारात्मक शक्तियां भी प्रबल होती है, श्मशान की नकारात्मक शक्तियां जल्दी ही व्यक्ति पर हावी हो जाती है। ऐसे मामलों में गायत्री मंत्र, दुर्गासप्तशती के मंत्र अथवा हनुमान और भैरव जैसे देवताओं के मंत्र विशेष रूप से कार्य करते हैं, उन्हें किसी भजन-कीर्तन में ले जाया जाए अथवा पूजा-पाठ वाले माहौल में ले जाया जाए तो भी नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिल जाएगी।