वायरल वीडियो से लिया गया एक चित्र
वायरल वीडियो से लिया गया एक चित्र

भोपाल/गुना/दक्षिण भारत/भाषा। मध्य प्रदेश के गुना में दलित दंपति को निर्दयता से पीटे जाने की घटना को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार रात को गुना के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं।

मध्य प्रदेश जनसंपर्क आयुक्त डॉ. सुदाम पी खाडे ने बताया, ‘गुना की घटना को गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री ने गुना के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए हैं।’ उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की बर्बरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

खाडे ने बताया, ‘मुख्यमंत्री ने गुना मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं और कहा है कि जो भी इस घटना में दोषी है उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।’

उल्लेखनीय है कि मप्र के गुना में पुलिस द्वारा दलित दंपति को निर्दयता से पीटे जाने की घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद देशभर में संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा और सोशल मीडिया पर मांग की जाने लगी कि इनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

गुना शहर के जगनपुर क्षेत्र में एक सरकारी मॉडल कॉलेज के निर्माण के लिए निर्धारित सरकारी जमीन के अतिक्रमण से जबरन निकाले गए एक दलित दंपति ने मंगलवार को इस मुहिम के विरोध में कीटनाशक पी लिया था।

दंपति और उनके परिवार के लोगों द्वारा अतिक्रमण हटाने की मुहिम का विरोध करने पर पुलिस ने निर्दयतापूर्वक लाठीचार्ज किया, जिसकी चौतरफा निंदा हो रही है। वहीं, कीटनाशक पी लेने के बाद पुलिस द्वारा दंपति को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां फिलहाल उनकी हालत में सुधार है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में दिखाई दे रहा है कि पुलिस लाठी से एक आदमी को पीट रही है और उसकी पत्नी और अन्य लोग उसे बचाने का प्रयास कर रहे हैं। इसमें महिला भी अपने पति के ऊपर लेट जाती है और महिला पुलिसकर्मी उसे मौके से हटाते हुए नजर आ रही हैं। वायरल तस्वीरों में, पुलिस की बर्बरता के कारण बच्चे रोते हुए दिखाई दे रहे हैं।

इससे पहले, जिलाधिकारी एस विश्वनाथन ने कहा था, ‘शहर की सीमा में सरकारी मॉडल कॉलेज के लिए एक जमीन आरक्षित थी। इस जमीन पर राजकुमार अहिरवार (38) और उसकी पत्नी सावित्री (35) खेत पर काम कर रहे थे। इन्हें वहां एक अतिक्रमणकर्ता गब्बू पारदी द्वारा बटाई पर काम दिया गया था।’

उन्होंने बताया कि जब अधिकारियों ने इन्हें जमीन खाली करने के लिये कहा तो इन्होंने विरोध किया और गब्बू के इशारे पर दंपति ने कीटनाशक पी लिया और उपचार के लिए अस्पताल जाने से भी इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इससे दंपति की जान जा सकती थी।

उन्होंने कहा कि दंपति जगह छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे और स्थिति गंभीर हो रही थी तो पुलिस ने उन्हें एवं अन्य लोगों को वहां से हटाने के लिए बल प्रयोग किया। इसके बाद दंपति को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया जहां उनकी हालत अब स्थिर है।

एक रिपोर्ट में बताया गया है कि मंगलवार को कार्रवाई के लिए पहुंचे प्रशासन से किसान दंपति ने अनुरोध किया था कि वह फसल कटाई तक रुक जाए, लेकिन पुलिस ने उनकी बात नहीं मानी और जेसीबी चलावा दी। घटना के कथित वीडियो में देखा गया कि पुलिस ने जिस हद तक बर्बरता की, उससे वहां चीख—पुकार मच गई। तस्वीरों में एक महिला पुलिसकर्मी किसान परिवार पर लात से प्रहार करते ​दिखाई दी।

भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस घटना पर ट्वीट किया, ‘गुना की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस संबंध में मैंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहानजी से चर्चा कर के ऐसे असंवेदनशील व दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्यवाही का अनुरोध किया है।’

इसके बाद अगले ट्वीट में सिंधिया ने कहा, ‘गुना की दुर्भाग्यपूर्ण घटना को गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहानजी ने गुना के कलेक्टर और एसपी को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दे दिए हैं।’