राकांपा प्रमुख शरद पवार के साथ एकनाथ खडसे
राकांपा प्रमुख शरद पवार के साथ एकनाथ खडसे

मुंबई/दक्षिण भारत। कभी भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे एकनाथ खडसे राकांपा में शामिल हो गए हैं। उन्होंने राकांपा प्रमुख शरद पवार की मौजूदगी में पार्टी का दामन थामा। क्या खडसे के राकांपा में जाने से महाराष्ट्र में उनकी पार्टी को फायदा होगा? ऐसे कई सवाल चर्चा में हैं और विश्लेषक उनका जवाब तलाश कर रहे हैं।

माना जा रहा है कि खडसे के दल बदलने से राकांपा को इसका फायदा होगा, खासतौर से उत्तर महाराष्ट्र में राकांपा इस दांव से खुद की जड़ें मजबूत कर सकती है। चूंकि इस क्षेत्र में खडसे का प्रभाव है। लिहाजा खडसे फैक्टर राकांपा को यहां बढ़त दिला सकता है।

जलगांव को खडसे का गढ़ कहा जाता है और महाराष्ट्र में किसी भी दल/गठबंधन की सरकार रही हो, यहां खडसे का प्रभाव रहा है। ऐसे में जब खडसे राकांपा के हो चुके हैं तो यह पार्टी जलगांव क्षेत्र में सियासी समीकरण अपने पक्ष में करने के लिए पूरा जोर लगाएगी।

कभी मजबूत कीं ‘कमल’ की जड़ें
जलगांव के अलावा उसके आसपास के जिलों में भी खडसे का प्रभाव माना जाता है। भाजपा के टिकट पर छह बार विधानसभा पहुंचे खडसे ने अपने सियासी दावपेंच से कांग्रेस की राह बहुत मुश्किल कर दी थी। उन्होंने जिला परिषद चुनाव में कांग्रेस का सफाया कर तीन दशक तक ‘कमल’ खिलाया था।

यही नहीं, भुसावल, फैजपुर, यावल, मुक्ताई नगर और वारणगांव नगरपालिका/नगर परिषद में भी भाजपा सत्ता तक पहुंची। बता दें कि खडसे की पत्नी मंदाकिनी और बेटी रोहिणी भी राजनीति में सक्रिय हैं। मंदाकिनी मिल्क फेडरेशन अध्यक्ष, तो रोहिणी जिला बैंक अध्यक्ष हैं। अगर खडसे स्थानीय समीकरण का रुख राकांपा के खेमे की ओर मोड़ने में सफल हो जाते हैं तो इससे पार्टी को फायदा मिलना तय है।

यहां बदलेगा सियासी नक्शा!
चर्चा यह भी है कि भविष्य में जलगांव जिला परिषद में अविश्वास प्रस्ताव से भाजपा को हटाया जा सकता है। चूंकि यहां राकांपा को मात्र एक वोट चाहिए। अगर यह उसके खाते में आता है तो सियासी नक्शा बदल सकता है। इसके अलावा, जलगांव जिले में लेवा पाटिल समाज का वोट भी राकांपा के खाते में आ सकता है। साथ ही जलगांव, धुले और नंदूरबार के डेढ़ दर्जन विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा को कड़ी टक्कर मिल सकती है।

राकांपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद एकनाथ खडसे ने दावा किया कि वे राकांपा के लिए भाजपा से ज्यादा सीटें जीतेंगे। वे अपनी पूर्व पार्टी से ज्यादा राकांपा के लिए परिश्रम करेंगे। उन्होंने जिला परिषद का जिक्र करते हुए कहा कि इसके लिए बहुत परिश्रम किया है और भविष्य में ये सब राकांपा की होंगी।

खडसे ने अपने राजनीतिक जीवन के बारे में कहा कि कभी किसी की पीठ में खंजर नहीं घोंपा और कभी किसी महिला का सहारा लेकर वार नहीं किया। उन्होंने कहा कि वे हमेशा सीधे और सामने बात कहते हैं।