मुंबई/भाषामालेगांव में २००८ में हुए बम विस्फोट के मुकदमे में एक विशेष अदालत ने यहां शुक्रवार को सात में से पांच आरोपियों के अनुपस्थित रहने के कारण क़डी आपत्ति जतायी क्योंकि इससे आरोप तय करने के काम को ३० अक्टूबर के लिए टालना प़डा। विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी अदालत की अध्यक्षता करते हुए न्यायाधीश विनोद प़ढालकर ने आरोपियों को कार्यवाही लंबित करने के प्रति आगाह किया। उन्होंने इस बात पर गंभीर आपत्ति जतायी कि सात में से केवल दो आरोपी-लेफ्टीनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित एवं समीर कुलकर्णी ही अदालत में उपस्थित हैं। अदालत ने मुकदमे की कार्यवाही को ३० अक्टूबर के लिए स्थगित कर दिया। अदालत ने कहा कि आरोपियों को अदालत के आदेश का पालन करने और अदालत में उपस्थित होने का यह अंतिम बार मौका दिया जा रहा है। न्यायाधीश प़ढाल्कर ने कहा, ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी अदालत को जानबूझ कर अनदेखी कर रहे हैं। यदि वे अगली तारीख को पेश नहीं हुए तो उनके खिलाफ समुचित आदेश दिए जाएंगे। इस बीच बंबई उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने पुरोहित द्वारा दाखिल याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया। पुरोहित ने उनके खिलाफ गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून के तहत अभियोजन चलाने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी है। उच्च न्यायालय द्वारा इस याचिका पर २९ अक्टूबर को सुनवाई किए जाने की संभावना है। उत्तरी महाराष्ट्र के मालेगांव में २९ सितंबर २००८ को एक मस्जिद के समीप मोटरसाइकिल पर बंधे विस्फोट उपकरण में विस्फोट होने से छह लोगों की जान गयी थी और १०० से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।