नई दिल्ली/भाषा। उच्च न्यायालय ने उत्तर पूर्वी दिल्ली में साम्प्रदायिक हिंसा में मारे गए लोगों के शवों के पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी करने के सभी अस्पतालों को शुक्रवार को निर्देश दिए। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति आईएस मेहता की पीठ ने अधिकारियों को सभी शवों के डीएनए नमूने सुरक्षित रखने और किसी भी अज्ञात शव का बुधवार तक अंतिम संस्कार नहीं करने का निर्देश दिया।

मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होनी है। अदालत ने ये निर्देश एक व्यक्ति की ओर से दायर बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए। व्यक्ति का रिश्तेदार दंगों के बाद से लापता है और याचिकाकर्ता ने उसकी जानकारी के लिए अदालत में याचिका दाखिल की है।

सुनवाई के दौरान पुलिस ने अदालत को बताया कि लापता व्यक्ति हमजा का शव गोकुलपुरी में एक नाले से सोमवार को बरामद किया गया था और उसका पोस्टमार्टम दिन में आरएमएल अस्पताल में किया जाएगा

गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को पुलिस को निर्देश दिया था कि वह उत्तरपूर्वी दिल्ली में दंगों के चलते सरकारी अस्पतालों के शवगृहों में लाए गए अज्ञात शवों के बारे में अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर पूरी जानकारी प्रकाशित करे।

अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह लापता हमजा के बारे में पता लगाने के लिए ‘हर संभव प्रयास’ करे। अदालत में पुलिस का प्रतिनिधित्व दिल्ली सरकार के स्थायी वकील (अपराध) राहुल मेहरा और वकील चैतन्य गोसैन कर रहे थे।

सुनवाई के दौरान मेहरा ने अदालत से कहा कि दिल्ली सरकार याचिकाकर्ता अंसारी मोहम्मद आरिफ को उन सभी अस्पतालों के शवगृहों में जाने की सुविधा उपलब्ध कराएगी जहां दंगों के दौरान मारे गए लोगों के शव रखे गए हैं।

पीठ ने दिल्ली पुलिस को केंद्र और राज्य के नियंत्रण वाले सभी अस्पतालों के शवगृहों में रखे हुए अज्ञात शवों की जानकारी फोटो के साथ अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने इस जानकारी में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डीएनए के नमूनों की भी जानकारी देने को कहा था।