logo
भारत-चीन सैन्य वार्ता करीब 16 घंटों तक चली
 
भारत-चीन सैन्य वार्ता करीब 16 घंटों तक चली
भारत एवं चीन के ध्वज। फोटो स्रोत: PixaBay

नई दिल्ली/भाषा। पूर्वी लद्दाख से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया को और विस्तार देने के लिए 10वें दौर की सैन्य वार्ता के दौरान भारत और चीन ने व्यापक चर्चा की। वार्ता करीब 16 घंटे चली। आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की तरफ मोल्डो सीमा बिंदु पर कोर कमांडर स्तरीय वार्ता शनिवार सुबह करीब 10 बजे शुरू हुई और रविवार तड़के दो बजे खत्म हुई। सूत्रों ने कहा कि वार्ता के दौरान पूर्वी लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा और देप्सांग जैसे गतिरोध वाले बिंदुओं से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

वार्ता के बारे में हालांकि अब तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। यह बातचीत दोनों सेनाओं के पैंगांग सो (झील) के उत्तरी व दक्षिणी किनारों के ऊंचाई वाले क्षेत्रों से सैनिकों व हथियारों की वापसी के पूरा होने के दो दिन बाद हुई।

माना जा रहा है कि भारत ने बातचीत के दौरान क्षेत्र में तनाव कम करने के लिये हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा और देप्सांग जैसे इलाकों से वापसी प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया।

सूत्रों ने शनिवार को कहा था कि बातचीत के दौरान व्यापक प्राथमिकता क्षेत्र में तनाव में कमी लाने की है। भारत इस बात पर जोर देता रहा है कि क्षेत्र में तनाव कम करने के लिये गतिरोध वाले सभी बिंदुओं से सैनिकों की वापसी जरूरी है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 11 फरवरी को संसद में एक बयान में कहा था कि भारत और चीन के बीच पैंगोंग झील क्षेत्र से सैनिकों को चरणबद्ध, समन्वित व प्रमाणिक तरीके से हटाने का समझौता हो गया है।

उन्होंने कहा था कि समझौते के अनुरूप चीन अपनी सेना की टुकड़ियों को हटाकर पैंगांग झील के उत्तरी किनारे में फिंगर आठ क्षेत्र की पूर्व दिशा की ओर ले जाएगा। उन्होंने कहा था कि भारत अपनी सैन्य टुकड़ियों को फिंगर तीन के पास अपने स्थायी शिविर धन सिंह थापा पोस्ट पर रखेगा।

सिंह ने कहा था कि इसी तरह का कदम पैंगांग झील के दक्षिणी तट क्षेत्र में उठाया जाएगा। सूत्रों ने कहा कि दोनों पक्षों के सैनिक समझौते के मुताबिक अपने ठिकानों पर वापसी की है। सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया 10 फरवरी को शुरू हुई थी।

शनिवार को हुई वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन कर रहे थे जो लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर हैं। वहीं, चीनी पक्ष का नेतृत्व मेजर जनरल लिउ लिन कर रहे थे जो चीनी सेना के दक्षिणी शिनजियांग सैन्य जिले के कमांडर हैं।

संसद में दिए अपने बयान में रक्षा मंत्री ने कहा था कि इस पर सहमति बनी है कि पैंगांग झील क्षेत्र में सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के 48 घंटे के भीतर दोनों पक्षों के वरिष्ठ कमांडरों की अगली बैठक अन्य सभी मुद्दों के समाधान के लिए बुलाई जाएगी।

इसके कुछ दिन बाद रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि देप्सांग, हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा समेत अन्य लंबित ‘समस्याओं’ को दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच आगामी वार्ता में उठाया जाएगा।

दोनों देशों के बीच पिछले साल पांच मई को पैंगांग झील क्षेत्र में हिंसक संघर्ष के बाद सैन्य गतिरोध शुरू हुआ था और फिर हर रोज बदलते घटनाक्रम में दोनों पक्षों ने भारी संख्या में सैनिकों तथा घातक अस्त्र-शस्त्रों की तैनाती कर दी थी। दोनों पक्षों की बीच हालांकि गतिरोध दूर करने के लिये इस दौरान सैन्य व कूटनीतिक बातचीत का दौर भी जारी रहा।

पिछले साल चीनी सेना ने फिंगर 4 और फिंगर 8 के इलाके केबीच कुछ बंकर और अन्य ढांचे बना लिये थे और भारतीय गश्ती दल को फिंगर 4 से आगे नहीं जाने दे रहे थे जिसका भारतीय सेना ने कड़ा प्रतिरोध किया था।

नौ दौर की सैन्य वार्ता में भारत ने विशेषकर पैंगांग झील के उत्तरी क्षेत्र में फिंगर 4 से फिंगर 8 तक के क्षेत्रों से चीनी सैनिकों की वापसी पर जोर दिया था। वहीं, चीन ने पैंगांग झील के दक्षिणी छोर पर सामरिक महत्व की चोटियों से भारतीय सैनिकों की वापसी पर जोर दे रहा था।

गतिरोध के लगभग पांच महीने बाद भारतीय सैनिकों ने कार्रवाई करते हुए पैंगोंग झील के दक्षिणी छोर क्षेत्र में मुखपारी, रेचिल ला और मगर हिल क्षेत्रों में सामरिक महत्व की कई पर्वत चोटियों पर तैनाती कर दी थी।