नई दिल्ली/भाषा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को प्रोत्साहन आर्थिक पैकेज की चौथी किस्त की घोषणा की। पैकेज की इस किस्त में कोयला, रक्षा विनिर्माण, विमानन, अंतरिक्ष, बिजली वितरण आदि क्षेत्रों में नीतिगत सुधारों पर जोर दिया।

वित्त मंत्री ने चौथी किस्त के बारे में जानकारी देते हुए खनिजों के खनन के क्षेत्र में कई सुधारों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लिए एक सपाट समग्र खोज एवं उत्पादन व्यवस्था लाई जाएगी। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा घोषित वृहद आर्थिक पैकेज की क्रमवार जानकारी देने की चौथी कड़ी में संवाददाताओं को बताया कि नई समग्र खोज-खनन-उत्पादन व्यवस्था के तहत खनिजों के 500 ब्लॉकों की नीलामी की जाएगी।

उन्होंने कहा कि एल्युमीनियम उद्योग की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने के लिए बॉक्साइट और कोयला ब्लॉकों की संयुक्त नीलामी की जाएगी। इससे एल्युमीनियम उद्योग को बिजली की लागत में कमी लाने में मदद मिलेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि खनन पट्टे के स्थानांतरण और अधिशेष खनिजों की बिक्री के लिए कैप्टिव (खुद के इस्तेमाल के लिए) और नॉन-कैप्टिव खानों के अंतर को समाप्त किया जाएगा। इससे दक्षता और उत्पादन बढ़ाया जा सकेगा।

पैकेज की चौथी किस्त की मुख्य बातें इस प्रकार हैं…
– कोयला क्षेत्र में निजी कंपनियों को वाणिज्यिक खनन शुरू करने के लिए करीब 50 ब्लॉक पेश किए जाएंगे। सरकार का एकाधिकार समाप्त होगा।

– कोयला क्षेत्र में वाणिज्यिक खनन के लिए प्रति टन शुल्क की व्यवस्था के बजाय राजस्व-भागीदारी व्यवस्था पेश की जाएगी।

– खनिज क्षेत्र में खोज-खनन-उत्पादन एक समग्र अनुमति की व्यवस्था की शुरुआत की जाएगी। 500 ब्लॉकों की नीलामी होगी।

– कुछ हथियारों/हथियार मंचों के आयात पर रोक लगेगी, ऐसे हथियार और साजो-सामान की खरीद सिर्फ भारत से की जा सकेगी।

– रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में स्वत: मंजूरी मार्ग से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 49 से बढ़ाकर 74 प्रतिशत की जाएगी।

– यात्री उड़ानों के लिए भारतीय वायु मार्गों पर लगी पाबंदियों में ढील दी जाएगी, इससे विमानन क्षेत्र को एक साल में एक हजार करोड़ रुपए का लाभ होगा।

– खदानों से निकाले गए कोयले के उठाव की बुनियादी सुविधाओं पर सरकार 50 हजार करोड़ रुपए खर्च करेगी।

– छह और हवाईअड्डों में निजी कंपनियों की भागीदारी के लिए नीलामी की जाएगी, 12 हवाई अड्डों में निजी कंपनियों से 13 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त निवेश मिलेगा।

– केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) का निजीकरण किया जाएगा।

– उपग्रहों, प्रक्षेपणों और अंतरिक्ष-आधारित सेवाओं समेत भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी कंपनियों को भगीदारी के अवसर मिलेंगे।

– कैंसर एवं अन्य बीमारियों के किफायती उपचार के लिए पीपीपी आधार पर अनुसंधान नाभिकीय संयंत्र बनाए जाएंगे।