प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को छह राज्‍यों के छह शहरों में वैश्‍विक आवासीय प्रौद्योगिकी चुनौती-भारत (जीएचटीसी-भारत) के तहत हल्के मकानों से जुड़ीं परियोजनाओं की आधारशिला रखी।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने समस्त देशवासियों को 2021 की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज नई ऊर्जा के साथ, नए संकल्पों के साथ और नए संकल्पों को सिद्ध करने के लिए तेज गति से आगे बढ़ने का शुभारंभ है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय में आवास योजनाएं केंद्र सरकारों की प्राथमिकता नहीं थीं, जितनी होनी चाहिए थीं। सरकार घर निर्माण की बारीकियों और क्वालिटी में नहीं जाती थी। हालांकि, हम जानते हैं कि परिवर्तन सर्वांगीण विकास के बिना असंभव है। देश ने एक नया तरीका और एक अलग राह अपनाई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ये छह प्रोजेक्ट वाकई लाइट हाउस यानी प्रकाश स्तंभ की तरह हैं। ये छह प्रोजेक्ट देश में हाउसिंग कंस्ट्रक्शन को नई दिशा दिखाएंगे। ये लाइट हाउस प्रोजेक्ट अब देश के काम करने के तौर-तरीकों का उत्तम उदाहरण हैं। हमें इसके पीछे बड़े विजन को भी समझना होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ये प्रोजेक्ट आधुनिक तकनीक और इनोवेटिव प्रोसेस से बनेंगे। इसमें कंस्ट्रक्शन का समय कम होगा और गरीबों के लिए ज्यादा अफॉर्डेबल और कम्फ़र्टेबल घर तैयार होंगे।

रांची में, हम जर्मनी से 3डी निर्माण प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं। इस पैटर्न में, हर कमरे को अलग से बनाया जाएगा और फिर पूरे ढांचे को लेगो ब्लॉक की तरह जोड़ा जाएगा। अगरतला में, हम न्यूजीलैंड से स्टील फ्रेम प्रौद्योगिकी का उपयोग करके घरों का निर्माण कर रहे हैं। यह घरों को भूकंप के जोखिम से रोकने के लिए है। लखनऊ में, हम कनाडा से प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रहे हैं। इसमें प्लास्टर और पेंट की जरूरत नहीं होगी और पूर्व निर्मित दीवारों का उपयोग किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विशेषज्ञों को तो इसके विषय में पता है। लेकिन देशवासियों को भी इनके बारे में जानना जरूरी है क्योंकि आज तो ये तकनीक एक शहर में इस्तेमाल हो रही है, कल को इन्हीं का विस्तार पूरे देश में किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा किदेश में ही आधुनिक हाउसिंग तकनीक से जुड़ी रिसर्च और स्टार्टअप्स को प्रमोट करने के लिए आशा इंडिया प्रोग्राम चलाया जा रहा है। इसके माध्यम से भारत में ही 21वीं सदी के घरों के निर्माण की नई और सस्ती तकनीक विकसित की जाएगी।