प्रधानमंत्री ने ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ तक संपर्क सुविधा में सुधार के लिए 8 ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। फोटो स्रोत: भाजपा ट्विटर अकाउंट।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। फोटो स्रोत: भाजपा ट्विटर अकाउंट।

अहमदाबाद/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देश के विभिन्न हिस्सों को गुजरात के केवड़िया से जोड़ने वाली आठ ट्रेनों को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हरी झंडी दिखाई। ये केवड़िया को वाराणसी, दादर, अहमदाबाद, हजरत निजामुद्दीन, रीवा, चेन्नई और प्रतापनगर से जोड़ेंगी।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि केवड़िया जगह भी ऐसी है जिसकी पहचान एक भारत-श्रेष्ठ भारत का मंत्र देने वाले, देश का एकीकरण करने वाले सरदार पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, सरदार सरोवर बांध से है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज केवड़िया के लिए निकल रहीं ट्रेनों में एक ट्रेन पुरैच्ची तलैवर डॉ. एमजी रामचंद्रन सेंट्रल रेलवे स्टेशन से भी आ रही है। यह भी सुखद संयोग है कि आज भारत रत्न एमजी रामचंद्रन की जयंती भी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस रेल कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा लाभ स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देखने आने वाले पर्यटकों को तो मिलेगा ही, साथ ही ये केवड़िया के आदिवासी भाई-बहनों का जीवन भी बदलने जा रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज केवड़िया गुजरात के सुदूर इलाके में बसा एक छोटा-सा ब्लॉक नहीं रह गया है, बल्कि केवड़िया विश्व के सबसे बड़े पर्यटक क्षेत्र के रूप में आज उभर रहा है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को देखने के लिए अब स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से भी ज्यादा पर्यटक पहुंचने लगे हैं। अपने लोकार्पण के बाद करीब-करीब 50 लाख लोग स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को देखने आ चुके हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि छोटा-सा खूबसूरत केवड़िया इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे प्लान तरीके से पर्यावरण की रक्षा करते हुए इकोनॉमी और इकोलॉजी दोनों का तेजी से विकास किया जा सकता है। बढ़ते हुए पर्यटन के कारण केवड़िया के आदिवासी युवाओं को रोजगार मिल रहा है। यहां के लोगों के जीवन में तेजी से आधुनिक सुविधाएं पहुंच रही हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते वर्षों में देश में रेलवे के पूरे तंत्र में व्यापक बदलाव करने के लिए काम किया गया। यह काम सिर्फ बजट बढ़ाना, घटाना, नई ट्रेनों की घोषणा करने तक सीमित नहीं रहा। यह परिवर्तन अनेक मोर्चों पर एक साथ हुआ है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अब जैसे केवड़िया को रेल से कनेक्ट करने वाले इस प्रोजेक्ट का ही उदाहरण देखें तो इसके निर्माण में मौसम और कोरोना महामारी जैसी अनेक बाधाएं आई। लेकिन रिकॉर्ड समय में इसका काम पूरा किया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ ही समय पहले मुझे पूर्वी और पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के एक बड़े सेक्सन का लोकार्पण करने का मौका मिला। इस प्रोजेक्ट पर 2006 से लेकर 2014 तक यानी लगभग 8 वर्षों में सिर्फ कागजों पर ही काम हुआ, 2014 तक 1 किमी तक भी ट्रैक नहीं बिछाया था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जब भारतीय रेल के ट्रांसफॉर्मेशन की तरफ हम आगे बढ़ रहे हैं तो उसके लिए हाइली स्किल्ड स्पेशलिस्ट मैनपॉवर और पेशेवर भी बहुत जरूरी है। वड़ोदरा में भारत की पहली डीम्ड यूनिवर्सिटी की स्थापना के पीछे यही मकसद है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज केवडिया का देश की हर दिशा से सीधी रेल कनेक्टिविटी से जुड़ना पूरे देश के लिए एक अद्भुत क्षण है। हमें गर्व से भरने वाला पल है। ये नई ट्रेनें और रेल लाइन अब केवड़िया की विकास यात्रा में नया अध्याय लिखने जा रही हैं।