मन की बात: वैक्सीन, लाइट हाउस, गोरैया से लेकर शहद क्रांति तक ये बोले मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। फोटो स्रोत: भाजपा ट्विटर अकाउंट।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। फोटो स्रोत: भाजपा ट्विटर अकाउंट।

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देशवासियों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मैं आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं कि आपने इतनी बारीक नज़र से ‘मन की बात’ को फॉलो किया है और जुड़े रहे हैं। यह मेरे लिए बहुत ही गर्व का, आनंद का विषय है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं आज इस 75वें एपिसोड के समय सबसे पहले ‘मन की बात’ को सफल बनाने के लिए, समृद्ध बनाने के लिए और इससे जुड़े रहने के लिए हर श्रोता का बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी स्वाधीनता सेनानी की संघर्ष गाथा हो, किसी स्थान का इतिहास हो, देश की कोई सांस्कृतिक कहानी हो, ‘अमृत महोत्सव’ के दौरान आप उसे देश के सामने ला सकते हैं, देशवासियों को उससे जोड़ने का माध्यम बन सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आप देखिएगा, देखते ही देखते ‘अमृत महोत्सव’ ऐसे कितने ही प्रेरणादायी अमृत बिंदुओं से भर जाएगा, और फिर ऐसी अमृत धारा बहेगी जो हमें भारत की आज़ादी के सौ वर्ष तक प्रेरणा देगी। देश को नई ऊंचाई पर ले जाएगी, कुछ-न-कुछ करने का जज्बा पैदा करेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज़ादी की लड़ाई में हमारे सेनानियों ने कितने ही कष्ट इसलिए सहे, क्योंकि वो देश के लिए त्याग और बलिदान को अपना कर्तव्य समझते थे। उनके त्याग और बलिदान की अमर गाथाएं अब हमें सतत कर्तव्य पथ के लिए प्रेरित करें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष ये मार्च का ही महीना था, देश ने पहली बार जनता कर्फ्यू शब्द सुना था। लेकिन इस महान देश की महान प्रजा की महाशक्ति का अनुभव देखिए, जनता कर्फ्यू पूरे विश्व के लिए एक अचरज बन गया था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अनुशासन का यह अभूतपूर्व उदाहरण था, आने वाली पीढ़ियां इस एक बात को लेकर के जरूर गर्व करेंगी। उसी प्रकार से हमारे कोरोना योद्धाओं के प्रति सम्मान, आदर, थाली बजाना, ताली बजाना, दिया जलाना। आपको अंदाजा नहीं है कोरोना योद्धाओं के दिल को कितना छू गया था वो और वो ही तो कारण है, जो साल भर वे बिना थके, बिना रुके डटे रहे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इन सबके बीच, कोरोना से लड़ाई का मंत्र भी जरूर याद रखिए- ‘दवाई भी-कड़ाई भी’। मितालीजी, हाल में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दस हजार रन बनाने वाली पहली भारतीय महिला क्रिकेटर बनी हैं। उनकी इस उपलब्धि पर बहुत-बहुत बधाई।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दिलचस्प है, इसी मार्च महीने में, जब हम महिला दिवस मना रहे थे, तब कई महिला खिलाड़ियों ने मेडल्स और रिकॉर्ड्स अपने नाम किए हैं। आज शिक्षा से लेकर उद्यमिता तक, सशस्त्र बलों से लेकर विज्ञान और तकनीक तक, हर जगह देश की बेटियां, अपनी अलग पहचान बना रही हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मन की बात’ के दौरान मैंने पर्यटन के विभिन्न पहलुओं पर अनेक बार बात की है, लेकिन, ये लाइट हास पर्यटन के लिहाज से अनूठे होते हैं। अपनी भव्य संरचनाओं के कारण लाइट हाउस हमेशा से लोगों के लिए आकर्षण के केंद्र रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भारत में भी 71 लाइट हाउस चिह्नित किए गए हैं। इन सभी लाइट हाउस में उनकी क्षमताओं के मुताबिक म्यूजियम, एम्फी-थिएटर, ओपन एयर थिएटर, कैफेटेरिया, चिल्ड्रन्स पार्क, इको फ्रेंडली कॉटेज और लैंडस्कैपिंग तैयार किए जाएंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं एक अनूठे लाइट हाउस के बारे में भी आपको बताना चाहूंगा। यह लाइट हाउस गुजरात के सुरेंद्र नगर जिले में जिन्झुवाड़ा नाम के एक स्थान में है। जानते हैं, यह लाइट हाउस क्यों खास है? यह लाइट हाउस जहां है, वहां से अब समुद्र तट सौ किलोमीटर से भी अधिक दूर है।

आपको इस गांव में ऐसे पत्थर भी मिल जाएंगे, जो यह बताते हैं कि यहां कभी एक व्यस्त बंदरगाह रहा होगा। यानी इसका मतलब ये है कि पहले तटरेखा जिन्झुवाड़ा तक थी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अभी कुछ दिन पहले वर्ल्ड्स स्पैरो डे मनाया गया। स्पैरो यानी गोरैया। कहीं इसे चकली बोलते हैं, कहीं चिमनी बोलते हैं, कहीं घान चिरिका कहा जाता है। आज इसे बचाने के लिए हमें प्रयास करने पड़ रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मेरे बनारस के एक साथी इंद्रपाल सिंह बत्राजी ने ऐसा काम किया है जिसे मैं ‘मन की बात’ के श्रोताओं को जरूर बताना चाहता हूं। बत्राजी ने अपने घर को ही गोरैया का आशियाना बना दिया है।

ओड़िशा के केंद्रपाड़ा के रहने वाले बिजयजी ने 12 साल मेहनत करके अपने गांव के बाहर समुद्र की तरफ 25 एकड़ का मैंग्रोव जंगल खड़ा कर दिया। आज यह जंगल इस गांव की सुरक्षा कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें नया तो पाना है, और वही तो जीवन होता है लेकिन साथ-साथ पुरातन गंवाना भी नहीं है। हमें बहुत परिश्रम के साथ अपने आस-पास मौजूद अथाह सांस्कृतिक धरोहर का संवर्धन करना है, नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कारबी आंगलोंग जिले के ‘सिकारी टिस्सौ’ जी पिछले 20 सालों से कारबी भाषा का दस्तावेजीकरण कर रहे हैं। उन्हें अपने इस प्रयासों के लिए कई जगह प्रशंसा भी मिली है और अवॉर्ड भी मिले हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के कृषि जगत में आधुनिकता समय की मांग है। कृषि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए नए विकल्पों, नए इनोवेशन्स को अपनाना जरूरी है। बी फार्मिंग देश में शहद क्रांति या स्वीट रिवॉल्यूशन का आधार बना रही है। बड़ी संख्या में किसान इससे जुड़ रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष इस समय सवाल था कि कोरोना की वैक्सीन कब तक आएगी। साथियों, हम सभी के लिए गर्व की बात है कि आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम चला रहा है।