रेलवे की पार्सल प्रबंधन प्रणाली का आधुनिकीकरण जारी

प्रतीकात्मक चित्र। स्रोत: PixaBay
प्रतीकात्मक चित्र। स्रोत: PixaBay

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। भारतीय रेलवे की पार्सल सेवा विभिन्न स्टेशनों से छोटी खेपों के लिए परिवहन सुविधा प्रदान करती है। छोटे व्यवसाय और व्यापारी (विशेष रूप से छोटे शहरों और कस्बों में) बड़े शहरों और विनिर्माण केंद्रों से अपने माल को तेजी से, विश्वसनीय और आसान तरीके से व्यापार के स्थान पर पहुंचाने के लिए इन सेवाओं का बड़े पैमाने पर उपयोग करते हैं। आम आदमी इन सेवाओं का उपयोग घरेलू सामान, फर्नीचर, दोपहिया वाहन आदि के परिवहन के लिए भी करते हैं – जिनके लिए पार्सल सेवा परिवहन का एक सुविधाजनक माध्यम है।

पार्सल शुल्क केवल वजन और आकार पर आधारित होते हैं, न कि सामान के प्रकार पर। रेलवे ने बताया कि पार्सल प्रबंधन प्रणाली का आधुनिकीकरण जारी है। प्रणाली के कम्प्यूटरीकरण का विस्तार दूसरे चरण में 84 स्थानों से 143 स्थानों और तीसरे चरण में 523 स्थानों तक किया जा रहा है। इससे पार्सल प्रणाली में और सुविधाएं जुड़ जाएंगी, जैसे: पार्सल प्रबंधन प्रणाली वेबसाइट पार्सल डॉट इंडियनरेल डॉट जीओवी डॉट इन का बेहतर ढंग से उपयोग, पीएमएस पार्सल के लिए 120 दिनों के अग्रिम आरक्षण का प्रावधान, पार्सल स्थान के लिए उपलब्धता पीएमएस वेबसाइट पर ऑनलाइन ई-फॉरवर्डिंग नोट मॉड्यूल।

रेलवे ने बताया कि इसके तहत कम्प्यूटरीकृत काउंटरों और इलेक्ट्रॉनिक तौल प्रणाली के माध्यम से स्टेशनों पर पार्सल कार्यालय में पार्सल / सामान का आरक्षण, पार्सल की ट्रैकिंग के लिए प्रत्येक खेप पर बारकोडिंग, जीपीआरएस नेटवर्क के माध्यम से बारकोड स्कैनिंग द्वारा स्थिति को अपडेट किया जाता है। इसके अलावा पंजीकृत मोबाइल नंबर पर पार्सल बुकिंग, लोडिंग, अनलोडिंग से हर चरण में ग्राहकों को एसएमएस, एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों के लिए पार्सल वेबसाइट पर ट्रैकिंग और प्रेषक का ऑनलाइन जीएसटीएन सत्यापन जैसी सुविधाएं भी दी जाएंगी।