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गायत्री देवी के पोते-पोती ही उनकी करोड़ों की संपत्ति के कानूनी वारिस
 

जयपुर। जयपुर की पूर्व महारानी गायत्री देवी की हजारों करो़ड की संपत्ति के मालिक उनके पोते और पोती देवराज सिंह और ललिता सिंह ही होंगे। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह साफ कर दिया है कि गायत्री देवी के पोते और पोती ही उनके कानूनी वारिस हैं।हाईकोर्ट के जज इस रविंद्र भट की बेंच ने हाई कोर्ट के २०१० के उस फैसले को भी पलट दिया जिसमें कहा गया था कि दिवंगत पूर्व महारानी गायत्री देवी के दो सौतेले बेटे भी उनकी संपत्ति में हकदार हैं। दरअसल गायत्री देवी के निधन के बाद से ही उनकी सैक़डों करो़ड की संपत्ति की दावेदारी को लेकर विवाद ख़डा हो गया था।गायत्री देवी के बेटे जगत सिंह की बेटे देवराज और बेटी लालित्या ने हाईकोर्ट ने दरवाजा खटखटाया था कि उनके चाचा उन्हें उनके पिता की संपत्ति से बेदखल करना चाहते हैं। उन्होंने कहा था कि जगत सिंह गायत्री देवी और पूर्व महाराज सवाई मानसिंह के बेटे थे, ऐसे में अपनी दादी गायत्री देवी की संपत्ति का हकदार वही है। याचिका में कहा गया था कि जगत सिंह का विवाह थाईलैंड की मॉम प्रियनंदना रंगासीत से हुआ है। जगत सिंह की मौत से पहले जो वसीयत बनाई गई थी उसमें गायत्री देवी के सारी संपत्ति का अधिकार जगत सिंह के पास था। गायत्री देवी का २९ जुलाई २००९ को निधन हो गया था। याचिका में दावा किया गया था कि उन्होंने एक वसीयत छो़डी थी इसमें कहा गया है क्योंकि पोते-पोती ही सारी संपत्ति के मालिक होंगे लेकिन दूसरी तरफ सवाई मानसिंह के दूसरी पत्नी के दो बेटे पृथ्वीराज सिंह और जयसिंह ने एक नया वसीयत पेश किया जिसमें कहा गया कि गायत्री देवी ने अपनी मौत से पहले अपनी संपत्ति का मालिक उन्हें बनाया है।दो वसीयतों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में मुकदमा चल रहा था। जगत सिंह के बेटे देवराज और बेटी लालित्या ने दलील दी हिंदू उत्तराधिकारी अधिनियम १९५६ के तहत प्रथम श्रेणी के कानूनी अधिकारी है। पृथ्वीराज सिंह की दूसरी पत्नी के बच्चे हैं इसलिए उन्हें गायत्री देवी का उत्तराधिकारी नहीं माना जा सकता।