दक्षिण भारत राष्ट्रमत के समूह संपादक श्रीकांत पाराशर
दक्षिण भारत राष्ट्रमत के समूह संपादक श्रीकांत पाराशर

श्रीकांत पाराशर
समूह संपादक, दक्षिण भारत

अगर लोकप्रिय फिल्म स्टार सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध स्थितियों में मृत्यु नहीं होती तो बालीवुड का असली चेहरा कभी उजागर नहीं होता। सुशांत की मौत की गुत्थी सुलझाने की जिम्मेदारी सीबीआई को दे दी गई। जांच के दौरान परिस्थितियां ऐसी बनीं कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) को इस जांच में कूदना पड़ा। एनसीबी की जांच जैसे जैसे आगे बढी वैसे वैसे बालीवुड का असली चेहरा सामने आने लगा और समूचा देश स्तब्ध रह गया। आज हालात ऐसे हैं कि बालीवुड की जानीमानी हस्तियों के नाम मादक पदार्थों के सेवन में सामने आ रहे हैं। अभी तो जांच में नामों की सूची प्रारंभ हुई है। ड्रग्स बिजनेस से जुड़े लोगों की गिरफ्तारियां हो रही हैं और उनसे जो जांच आगे बढ रही है उससे लगता है कि बालीवुड के स्टार्स और निर्माता निर्देशकों की सबसे अगली पंक्ति के लोगों के नाम भी सामने आयेंगे। अग्रणी पंक्ति की कुछ अभिनेत्रियों के नाम सामने आ गए हैं। सुशांत की मौत के मामले में मुख्य आरोपी रिया चक्रवर्ती अगर नहीं पकड़ी जाती तो मादक पदार्थों से जुड़ी भयानक स्थिति और बालीवुड में इस मकड़जाल का कभी पर्दाफाश नहीं होता।

बालीवुड का एक और काला पक्ष है जो समय समय पर उजागर होता रहता है। कुछ दिनों तक सुर्खियों में रहने के बाद ऐसे मामले ठंडे बस्ते में चले जाते हैं परंतु इस बार एक बेहद चर्चित और लोकप्रिय अभिनेत्री कंगना रनौत ने बालीवुड में कास्टिंग काउच यानी फिल्मों में काम देने के एवज में फिल्म में रोल पाने को लालायित नई लड़कियों का निर्माता, निर्देशकों, अभिनेताओं द्वारा यौन शैषण। बड़ी बड़ी फिल्मी हस्तियों पर पूर्व में ऐसे आरोप लग चुके हैं और एक दौर तो ऐसा भी आया कि “मी टू” अभियान चला जिसमें अभिनेत्रियों ने हिम्मत कर एक्टरों, निर्माता निर्देशकों पर बेझिझक आरोप लगाए। कुछ ने तो पुलिस में मामले भी दर्ज कराए जिनकी अभी जांच चल रही है। अभी अभी अभिनेत्री पायल घोष ने प्रख्यात निर्देशक अनुराग कश्यप पर यौन शोषण का आरोप लगाया है। पायल ने मंगलवार को अनुराग के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज करा दी है। कुल मिलाकर इन दिनों बालीवुड चर्चा में तो है परंतु सराहनीय उपलब्धियों के लिए नहीं बल्कि फिल्मोद्योग में व्याप्त गंदगी के लिए।

यह सब को पता है कि युवा पीढी किस प्रकार से फिल्मी सितारों की फैन होती है। हमारे देश का युवा फिल्म कलाकारों को बहुत फोलो करता है और उन्हें अपना आइकॉन मानने लगता है। उनके जैसा पहनावा, उनके जैसी चालढाल, उनके जैसे कारनामे करने को युवा लड़के लड़कियां लालायित रहते हैं। इनकी दीवानगी इस हद तक होती है कि ये अपने पसंदीदा स्टार या एक्ट्रेस के खिलाफ एक शब्द सुनने को तैयार नहीं होते। इसके लिए ये किसी से भी लड़ सकते हैं, अपने घनिष्ठ से घनिष्ठ मित्र से दोस्ती भी तोड़ सकते हैं परंतु अपने चहेते स्टार की बुराई नहीं सुन सकते। यह कोई अच्छी या गर्व करने वाली स्थिति नहीं है लेकिन यह सच्चाई है। सिल्वर स्क्रीन पर किशोर व युवा मन जो देखता है वह उससे बहुत अधिक प्रभावित होता है। वह फैंटासी को सच मानने लगता है और उसी में खुशी महसूस करता है।

वर्तमान में बालीवुड जिन बीमारियों के कारण चर्चा में है उससे युवा मन को भी गहरा धक्का लगा होगा। हमें अपने, फिल्मों से प्रभावित बच्चों को स्नेह प्यार से समझाना चाहिए कि बालीवुड से जुड़े लोग आइकॉन बनाने लायक नहीं होते। उनको केवल मनोरंजन तक सीमित रखना चाहिए। वे जो स्क्रीन पर दर्शाते हैं वह बस फैंटासी से ज्यादा कुछ नहीं। उसमें सच्चाई नहीं, अभिनय होता है। असल जिंदगी में वे कुछ और होते हैं। इसलिए ये स्टार अनुकरण करने योग्य नहीं होते। युवामन को समझते हुए उन्हें समय रहते इस तरह समझाने की जरूरत है कि वे कोई बुराई ग्रहण करने से बच जाएं।