पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने युवाओं को देश का भविष्य बताया और कहा कि युवाओं पर ही पूरे राष्ट्र का भविष्य निर्भर है। नीतीश ने शनिवार को यहां सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित राष्ट्रीय युवा संसद को संबोधित करते हुए कहा कि युवाओं पर ही पूरे देश का भविष्य निर्भर है। भारत में युवा आबादी बाकी देशों की तुलना में सर्वाधिक है और देश के अंदर सर्वाधिक युवा आबादी आनुपातिक रूप से बिहार में है। उन्होंने कहा कि यह अपने आप में काफी महत्वपूर्ण बात है कि आज इस पाटलिपुत्रा राष्ट्रीय युवा संसद में युवाओं द्वारा विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री ने मगध साम्राज्य की चर्चा करते हुए कहा कि मगध साम्राज्य के विस्तार को देखें तो वह आज के भारत से ब़डा इलाका था, जिसकी राजधानी पाटलिपुत्र थी। बिहार शिक्षा का भी केन्द्र था। नालन्दा, बिक्रमशिला, उद्वंतपुरी विश्वविद्यालय के साथ-साथ तेलहारा विश्वविद्यालय भी यहीं थे। उन्होंने कहा, ‘मुझे शुरू से यह महसूस होता है कि बिहार में राजनीति के प्रति आकर्षण सबसे ज्यादा है। यहां राजनीतिक बात करते हुए सब मिलेंगे। आप कहीं भी जाईए राजनीतिक बात पर सब चर्चा करते हैं।कुमार ने स्वतंत्रता संग्राम में बिहार के योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि वर्ष १८५७ में वीर कुंवर सिंह के योगदान को देखें, इसी तरह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का चम्पारण सत्याग्रह में भी अहम योगदान था। चम्पारण सत्याग्रह से ना सिर्फ किसानों के ऊपर हो रहे अत्याचार को समाप्त करने में सफलता मिली बल्कि सत्याग्रह के बाद आजादी की ल़डाई जन आन्दोलन में परिणत हो गई थी। चम्पारण सत्याग्रह के ३० साल के अन्दर ही देश को आजादी मिल गई थी।मुख्यमंत्री ने कहा कि चंपारण में गांधी ने न सिर्फ राजनैतिक अभियान चलाया था बल्कि सामाजिक आन्दोलन की भी शुरुआत की थी। चम्पारण सत्याग्रह के साथ-साथ राष्ट्रपिता ने स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, भेदभाव से मुक्ति आदि के लिए भी कार्य प्रारंभ किया था। उन्होंने जेपी के संपूर्ण क्रांति की चर्चा करते हुए कहा कि जेपी के नेतृत्व में एक ब़डा परिवर्तन आया और लाखों लोग जेल गए। केंद्र में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी। उन्होंने कहा कि बिहार में राजनैतिक अभियान बहुत चले हैं लेकिन समाज सुधार के क्षेत्र में बहुत प्रयास नहीं हुआ है। सामाजिक मसले काफी जटिल हैं।नीतीश ने कहा कि शराबबंदी से राज्य में नए सामाजिक क्रांति का सूत्रपात किया है। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि यदि लोगों ख़ासकर युवाओं की मदद नहीं मिलती, तो शराबबंदी के अभियान को लागू करने में सरकार सफल नहीं होती। लोगों की मानसिकता को बदलकर कामयाबी पाई जा सकती है, यह शराबबंदी ने सिखाया। उन्होंने शराबबंदी और नशामुक्ति को लेकर आयोजित मानव श्रृंखला की चर्चा करते हुए कहा कि अभियान में करो़डों लोगों ने शपथ ली। कुमार ने पुत्र-पुत्री को लेकर सामाजिक सोच की चर्चा करते हुए कहा कि समाज में यह आज भी हो रहा है। बेटा पैदा होने पर लोग खुशियां मनाते हैं, बेटी पैदा होने पर नहीं। ल़डकों के शिशु मृत्यु दर में काफी कमी आई है लेकिन ल़डकियों के शिशु मृत्यु दर में उतनी कमी नहीं है। लोग बेटों के बीमार होने पर तत्काल इलाज कराते हैं, ऐसा ही बेटी में भी होना चाहिए। बेटा हो या बेटी दोनों का तुरंत इलाज कराना चाहिए।