बेंगलूरु। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले कर्नाटक के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह दौरे के दूसरे दिन रविवार को आदिचुनचनागिरि मठ गए। शाह ने मठ के मौजूदा महंत निर्मलानंदनाथ स्वामी से मुलाकात की और मंदिर में पूजा की। बाद में उन्होंने पूर्व के महंत बालगंगाधरानाथ स्वामीजी पर शीर्षक ‘स्टोरी ऑफ ए गुरू’’ नामक पुस्तक जारी की। शाह ने कहा कि आज का दिन मेरे लिए बेहद प्रसन्नता है क्योंकि मैं पहली बार आदिचुनचनगिरि मठ के प्रांगण में हूं और यह मेरे लिए सम्मान की बात है कि मुझे बालगंगाधर स्वामीजी के जीवन पर आधारित पुस्तक का विमोचन करने के लिए कहा गया। उन्होंने कहा कि पुरातन काल से ही भारत में समाज कल्याण को सशक्त करने में धार्मिक संस्थानों और मठों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि जब नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने तब वर्ष-२०१४ में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में भारतीय संस्कृति की महत्ता पर ध्यान आकृष्ट कराया और उन्होंने हर वर्ष २१ जून को विश्व योग दिवस मनाने का दबाव बनाया जिसके परिणास्वरूप पूरी दुनिया अब हर वर्ष योग दिवस मना रही है। उन्होंने कहा कि विश्व योग दिवस को साकार करने के पीछे मुख्य रूप से हमारे देश के संत और मठ प्रमुख हैं जिन्होंने वर्ष-२०११ में मोदी से इस संबंध में अपील की थी। उन्होंने कहा, यहां आकर अगर मैं आदिचुनचनगिरि मठ के अनुयायी नादप्रभु केंपे गौ़डा को याद नहीं करूं तो मेरा कर्तव्य पूरा नहीं होगा। शाह ने कल्याणकारी समाज के प्रति भारत में मठों और धार्मिक संस्थानों द्वारा किये गए कार्यों की भी सराहना की। शाह ने कहा दुनिया के कई देशों में समाज का कल्याण सुनिश्चित करने का पूरा कर्तव्य पूरी तरह से सिर्फ सरकार का है। वहीं पूरी दुनिया में यह केवल भारत में है जहां कल्याणकारी समाज बनाने के प्रयास सरकार के साथ मठ और धार्मिक संस्थानों द्वारा किया जा रहा है और कभी-कभी ये मठ और संस्थान का प्रयास सरकार से भी दो कदम आगे रहता है। प्र्ह्झैंय्यध्ख्य् फ्द्बरुख्रय्द्भ द्बष्ठ्र झ्स्ट्ठ द्धढ्ढणय्द्मष्ठ ·र्ैंर्‍ ·र्ैंह्यप्रय्प्रय्मठ के प्रति राज्य में प्रभावशाली वोक्कालिगा समुदाय की अगाध आस्था है। मंड्या जिले के नागमंगला तालुक स्थित मठ का वोक्कालिगा में बहुत प्रभाव है। उनकी इस यात्रा को समुदाय को रिझाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। लिंगायत के बाद कर्नाटक में वोक्कालिगा दूसरा सबसे ब़डा समुदाय है। कर्नाटक के दक्षिणी क्षेत्र या पुराने मैसूरु में उसकी महत्वपूर्ण उपस्थिति है। शाह ने कहा कि वर्तमान में देश के कई छोटे राज्यों ने शिक्षा या स्वास्थ्य क्षेत्र में जो उपलब्धियां हासिल नहीं की हैं वह धार्मिक संस्थानों और मठों ने हासिल की है और आदि चुनचनगिरि मठ ने इसे साबित किया है। उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि कि मठ ४६० से अधिक शिक्षा संस्थान चला रहा है और १,३५,००० से अधिक छात्र प़ढ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बेंगलूरु से मठ की यात्रा के दौरान उन्हें पता चला कि बेंगलूर के निर्माता, नाद प्रभु केम्पेगौ़डा भी इस मठ के भक्त थे और विजयनगर से आने के बाद उन्होंने इस मठ को भारतीय संस्कृति बनाए रखने के लिए चुना था।