जयपुर। राजस्व एवं उपनिवेशन राज्यमंत्री अमराराम ने कहा है कि वैज्ञानिक तरीके से लैण्ड रिकार्ड मॉडर्नाइजेशन आज की महत्ती आवश्यकता है। इसे धरातल पर साकार करने में सैटलमेंट विभाग की अहम भूमिका है। अमराराम शुक्रवार को दुर्गापुरा में राज्य कृषि प्रबंध संस्थान में डिजीटल इण्डिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी) के तहत प्रदेश में सर्वे एवं री-सर्वे के तकनीकी पक्षों के सम्बन्ध में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सैटलमेंट विभाग बहुत पुराना विभाग है, जब भी सीमाओं अथवा भूमि के विवाद सामने आते हैं तो त्रुटियों का निदान करते हुए यह विभाग पूरी जिम्मेदारी से अपने कर्तव्य का निर्वहन करता है। ृय्थ्रु्यद्म·र्ैं त्र·र्ैंद्मर्‍·र्ैं फ्ष्ठ ख्ररूद्यख्य्द्बर्‍ झ्यद्यह्लय्य्द्ब राजस्व राज्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश डिजीटल इण्डिया के तहत आधुनिक तकनीक अपनाते हुए विकास के शिखर की ओर अग्रसर है। डीआईएलआरएमपी के तहत भारत सरकार की मंशा के अनुरूप प्रदेश के ११ जिलों में जमाबंदी व नक्शों का डिजिटाईजेशन तथा मॉडर्न रिकार्ड रूम तैयार करने जैसे कार्य चल रहे हैं, शेष २२ जिलों में शीघ्र ही ये कार्य प्रारम्भ होंगे। इनसे जनता के व्यापक हित में दूरमागी परिणाम आएंगे।अमराराम ने कहा कि मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे की सोच है कि कदम ऐसे रखो कि निशान बन जाएं, विकास ऐसा करो कि मिसाल बन जाए। उन्होंने कार्यशाला में उपस्थित अमीन, पटवारी, ए.एस.ओ. व एस.ओ. सहित सैटलमेंट विभाग के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियोें से इसी भावना के अनुरूप भू-अभिलेख आधुनिकीकरण के कार्य को सम्पादित करने का आह्वान किया। द्नरू्यद्ब झ्श्नख्यत्र ·र्ैंय् द्बरूध् ृय्थ्य्द्यभू-प्रबन्धन आयुक्त एवं नोडल अधिकारी डीआईएलआरएमपी अम्बरीष कुमार ने कहा कि भूमि मनुष्य एवं अर्थव्यवस्था के विकास का मूल आधार है। लैण्ड रिकार्ड डिजिटाईजेशन से लोगों के लिए अपनी जमीन से सम्बन्धित ट्रान्जेक्शन आसान होगा। इसीलिए भारत सरकार ने यह कार्यक्रम चलाया है जिसके तहत राज्य सरकार के राजस्व विभाग द्वारा यह महत्ती कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके लिए मूल ढांचा तैयार हो गया है तथा कम्पनियों का चयन कर उनके माध्यम से कार्य किया जा रहा है।