जयपुर। शिक्षा राज्य मंत्री श्री वासुदेव देवनानी ने प्रदेश के शैक्षिक उन्नयन में अधिकाधिक सामाजिक सहभागिता का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का यह प्रयास है कि शिक्षा में गुणवत्ता के साथ विद्यालयों के जरिए विद्यार्थियों का संस्कार निर्माण हो। उन्होंने शैक्षिक गुणवत्ता में नवाचारों को अपनाते हुए कार्य किए जाने पर जोर दिया है।देवनानी बुधवार को यहां रामनिवास बाग स्थित राजस्थान राज्य भारत स्काउट, गाइड भवन में अरबिन्दो सोसाइटी द्वारा प्रारंभ मुहिम शून्य निवेश के साथ शिक्षा में नवोन्मेष से संबंधित विशेष संवाद कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान देश का पहला राज्य है जहां पर शून्य निवेश आधारित नवाचारों को ब़ढावा देते हुए शैक्षिक उन्नयन के कार्य किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर शिक्षण की गुणवत्ता और समुचित मोनिटरिंग के लिए पंचायत एजुकेशन ऑफिसर (पीईओ) के पद सृजन, शिक्षकों का नेतृत्व प्रशिक्षण आदि इसी के परिणाम है। उन्होंने बताया कि शिक्षा में सुधार और हरेक बच्चे को शिक्षा प्रदान करने के लिए जितने भी प्रयास किए जाएं, कम है। उन्होंने सामाजिक सहभागिता के अंतर्गत सभी को शिक्षा में सहयोग देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विद्यालयों के सुदृ़ढीकरण के लिए स्थापित मुख्यमंत्री विद्यादान कोष में ७ करो़ड से अधिक की राशि अब तक संग्रहित की गई है। इसके अलावा विद्यालयों में अक्षय पेटिका रखवाए जाने के अंतर्गत भी स्थानीय स्तर पर निरंतर विद्यालयों के विकास के लिए सहयोग मिल रहा है। उन्होंने सीएसआर के तहत कॉरपोरेट घरानों को शिक्षा की मूलभूत आवश्यकताओं को केन्द्र में रखते हुए राज्य सरकार को अधिकाधिक सहयोग किए जाने का आह्वान किया। देवनानी ने कहा कि राजस्थान शैक्षिक नवाचार में अग्रणी राज्य है। अरबिन्दो सोसायटी ने शिक्षा में नवाचारों को ब़ढावा देने का जो राष्ट्रीय स्तर पर बी़डा उठाया है, वह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में ७० हजार सरकारी विद्यालयों में ८५ लाख बच्चे प़ढ रहे हैं। निजी विद्यालयों को भी इसमें मिला लिया जाए तो करो़डों बच्चे शिक्षा से लाभान्वित हो रहे हैं। इन सबको संस्कारित करने और इनको अच्छे नागरिक बनाने के लिए समाज की भी इतनी ही जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रदेश के विद्यालयों में शिक्षण की गुणवत्ता और शैक्षिक सुधारों के लिए किए गए प्रयासों की चर्चा करते हुए कहा कि राजस्थान सरकार विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने के साथ ही पाठ्यपुस्तकें भी निःशुल्क दे रही है। शून्य निवेश के आधार पर राज्य सरकार ने विद्यालयों की मोनिटरिंग की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की है। पाठ्यपुस्तकों में २०० से अधिक महापुरूषों की प्रेरक जीवनियों को सम्मिलित किया गया है। उद्देश्य यही है कि राजस्थान के बच्चे बेहतर शिक्षा प्राप्त करने के साथ ही संस्कारित समाज के बेहतर नागरिक बनें।राजस्थान प्राथमिक शिक्षा परिषद् के डॉ. जोगाराम ने इस अवसर पर बताया कि राजस्थान में प्रारंभिक शिक्षा के अंतर्गत इस तरह के प्रशिक्षण राज्य सरकार प्रदान कर रही है, जिनसे बच्चों को खेल-खेल में प़ढाने और उनकी कलात्मक अभिरूचि को पंख दिए जा सकें। उन्होंने कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण का भी उद्देश्य यही है कि शिक्षा में जो कुछ विश्वभर में हो रहा है, उसे अपनाते हुए राजस्थान के शिक्षक निंरतर आगे ब़ढें। अरबिन्दो सोसायटी के निदेशक, शिक्षा श्री सम्भ्रान्त ने बताया कि सोसायटी ने देशभर में शिक्षा में शून्य निवेश नवाचार कार्यक्रम संचालित कर रही है। इसके तहत शिक्षकों का प्रशिक्षण इस तरह से कराया जाता है कि शिक्षा क्षेत्र में उनके नवाचारों को एकत्र किया जा सके। इन नवाचारों के आधार पर देश में बेहतर शिक्षा के मॉडल पर कार्य किया जाएगा। उन्होनें बताया कि एचडीएफसी बैंक द्वारा शिक्षा में शून्य निवेश नवाचार को सहयेाग प्रदान किया जा रहा है।