प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक चित्र

बाजार को बचाने की एक नैतिक पहल

श्रीकांत पाराशर
समूह संपादक,
दक्षिण भारत राष्ट्रमत

इन दिनों व्यापारियों के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं और इन वीडियो की खूब तारीफ भी हो रही है। इन वीडियो में एक समानता दिखाई देती है कि वीडियो में अपील करने वाले व्यापारी तो अलग अलग हैं परंतु सबका सार एक ही है, सब का संदेश एक ही है। यह सभी वीडियो एक ही संदेश देते हैं कि व्यापार कोई भी हो, उसमें यदि आप रिटेल व्यापारी हैं तो आपके स्टाकिस्टों ने या होलसेलरों ने या मैन्यूफैक्चरों ने सामान्य समय में आपको उधारी में माल भेज भेज कर आपका खूब सहयोग किया। वही माल बेचकर आपने पैसा कमाया। आप बड़े रिटेलर बने। आप समृद्ध हुए। आपने सभी सुख सुविधाएं जुटाईं और मौज कर रहे हैं। अब कोरोना के कारण पूरे देश में अचानक हालात खराब हो गए हैं। सब प्रकार के बिजनेस पर कुप्रभाव पड़ा है। हालांकि लाकडाउन खत्म हो गया परंतु ग्राहक अभी भी डरा हुआ है। वह चाह कर भी दुकान पर नहीं आ रहा।

आप अगर रिटेल व्यापारी हैं तो आप ग्राहक का इंतजार कर रहे हैं। ग्राहक आ नहीं रहा, आपका माल बिक नहीं रहा। आप खुद परेशानी में हैं। आपको अपना भविष्य भी डांवाडोल दिखाई दे रहा है। ऐसे में कहीं परिस्थितियों के दबाव में अपनी नीयत खराब न कर लेना। होलसेलर या मैन्यूफैक्चरर का पेमेन्ट मत रोक लेना। होलसेलर या मैन्यूफैक्चरर तो यों ही घबराये हुए हैं। उनका करोड़ों रुपया अपने अधीनस्थ व्यापारियों में उधारी के रूप में अटका पड़ा हुआ है। अगर वह फोन करके पेमेंट का तकाजा करे भी तो उसे जवाब में क्या मिलेगा, वह जानता है। वर्तमान हालात में किसी से पेमेंट पूछना, जले पर नमक छिड़कने जैसा है। नहीं पूछे तो होलसेलर और मैन्यूफैक्चरर करेगा क्या? उसे भी तो सरवाइव करना है। कोई डिस्ट्रीब्यूटर पेमेंट पूछने की हिम्मत करता है तो उसे या तो भली बुरी सुननी पड़ती है या फिर उसे अपना माल रिटर्न लेना पड़ता है। आज सबसे बुरी हालत उसी की है।

कुछ भले व्यापारियों ने उन बड़े डिस्ट्रीब्यूटरों और मैन्यूफैक्चरों की पीड़ा को समझते हुए ही ये वीडियो बनाए हैं जिनमें आग्रह किया गया है कि जानबूझकर किसी का पेमेंट न रोकें। व्यवसाय को गति प्रदान करने के लिए यह जरूरी है कि थोड़ा थोड़ा पेमेंट भी किया जाए और बिक्री अनुसार थोड़ा थोड़ा माल भी उन्हीं से लिया जाए जिनसे पहले लेते रहे हैं। यह श्रृंखला टूटे नहीं। इन वीडियो में अच्छी मार्मिक अपील की गई है ताकि अपील का असर हो। एक वीडियो में तो होलसेलर और मैन्यूफैक्चरर को भगवान का दर्जा दिया गया है। वीडियो में कहा गया है कि भगवान को हमने नहीं देखा। हमारे लिए तो यही भगवान हैं जिनकी वजह से हमने सब सुख भोगे और सारी सुविधाएं हमारे पास हैं। इसलिए ऐसे भगवान से हम धोखा कैसे कर सकते हैं?

एक अन्य वीडियो में मुम्बई, अहमदाबाद, सूरत जैसे शहरों का नाम भी लिया जा रहा है, जहां ये मैन्यूफैक्चरर हैं और जिनसे माल उधार में मिलता है। अधिकांश वीडियो सूटिंग, सर्टिंग्स, रेडीमेड गारमेंट्स, साड़ी व्यवसाय से संबंधित लगते हैं ऐसा अनुमान है, क्योंकि इन्हीं व्यापार में उधारी का प्रचलन ज्यादा है और लाकडाउन के चलते दुकानें दो महिने से ज्यादा बंद रहने से इन व्यवसाय के रिटेलर सीधे सीधे प्रभावित हुए हैं और काफी ज्यादा प्रभावित हुए हैं परंतु अब जब व्यापार गति पकड़ेगा तब रिटेल में नकद पेमेंट आएगा, वह पेमेंट होलसेलरों को करने में कोई कोताही न बरती जाए, इस भावना से ये वीडियो वायरल हुए हैं।

एक कपड़ा व्यवसायी ने कहा कि निश्चित रूप से ऐसे वीडियो से बाजार में एक सकारात्मक माहौल पैदा हुआ है और होलसेलरों की भी हिम्मत बढी है, चिंता कम हुई है। उन्हें लग रहा है कि रिटेल व्यापारी उसकी चिंता कर रहा है। रिटेल व्यापारियों में भी यह जागरूकता आ रही है कि वे नैतिकता को आगे महत्व देते रहेंगे। रिटेलर जब होलसेलर को बकाया पेमेंट करेगा तो होलसेलर भी मैन्यूफैक्चरर को पेमेंट करेगा। यह सिलसिला शुरू होगा तो व्यापार भी पहले की तरह पटरी पर आ जाएगा। बाजार की खुशहाली के लिए यह जरूरी है।