ये है कश्मीरियत: स्थानीय मुस्लिमों के सहयोग से 31 साल बाद खुला मंदिर, हुई पूजा-अर्चना

मंदिर का दीया.. प्रतीकात्मक चित्र। फोटो स्रोतः PixaBay
मंदिर का दीया.. प्रतीकात्मक चित्र। फोटो स्रोतः PixaBay

श्रीनगर/दक्षिण भारत। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में एक मंदिर के पट तीन दशक बाद खुले हैं। 31 साल पहले जब घाटी में हालात बिगड़े तो कश्मीरी हिंदुओं को पलायन करना पड़ा था, तब से मंदिर के पट बंद थे। अब यहां के शीतलनाथ मंदिर में बसंत पंचमी को विशेष पूजा की गई।

कश्मीर घाटी में सुधरते हालात के मद्देनजर यह खबर इसलिए भी खासी अहमियत रखती है क्योंकि मंदिर फिर से खुलवाने में स्थानीय मुस्लिम समाज का बड़ा योगदान है। इस मौके पर श्रद्धालुओं ने मंदिर में दर्शन किए और पूजा-अर्चना की।

हब्बा कदल क्षेत्र का यह मंदिर पूर्व में कट्टरपंथ और आतंकवाद का निशाना बना था। इससे पहले यहां स्थानीय हिंदू समाज के लोग पूजा करने आते थे लेकिन हालात बिगड़ने के कारण वे अन्य स्थानों पर चले गए। एक श्रद्धालु ने बताया कि उन्हें मंदिर के दोबारा खोले जाने के फैसले से बहुत खुशी है। इसके लिए मुस्लिम समाज ने बहुत सहयोग किया है।

एक अन्य श्रद्धालु ने कहा कि स्थानीय मुसलमानों ने मंदिर की सफाई में योगदान दिया। साथ ही पूजन सामग्री का इंतजाम किया। उन्होंने इस पहल को सराहते हुए कहा कि बसंत पंचमी जैसे पर्व यहां सद्भावपूर्वक मनाए जाते थे। उन्होंने उम्मीद जताई कि कश्मीर में शांति के वातावरण की वापसी होगी और पहले ही तरह ही लोग अपने धार्मिक स्थलों पर जा सकेंगे।

बता दें कि अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधान निष्प्रभावी किए जा चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अलगाववाद और हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी के लिए ये प्रावधान काफी हद तक जिम्मेदार थे। इनके हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में हालात सुधर रहे हैं। पत्थरबाजी की घटनाएं काफी कम हो गई हैं। वहीं, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में बड़ी संख्या में आतंकवादियों का खात्मा कर दिया गया है।