उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

लखनऊ/दक्षिण भारत। संन्यासी से राजनेता बने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम भाजपा के उन नेताओं में शुमार है जिनका सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा जिक्र होता है। बात उत्तर प्रदेश में अपराधियों पर शिकंजा कसने की हो या सीएए विरोध के नाम पर उत्पात मचाने वाले असामाजिक तत्वों की संपत्ति जब्त करने संबंधी आदेश देने की, योगी आदित्यनाथ की छवि एक ऐसे प्रशासक की है जो जरूरत पड़ने पर सख्त फैसले लेता है।

आपको ट्विटर पर योगी की ऐसी कई तस्वीरें मिल जाएंगी जो उनके प्रशंसकों ने पोस्ट की हैं, जिनमें मुख्यत: इस बात को दर्शाया जाता है कि योगी वोटों के लिए किसी का तुष्टीकरण नहीं करते। अगर बात उत्तर प्रदेश की राजनीति की करें तो यहां भी योगी आदित्यनाथ कई दिग्गजों पर भारी पड़ते हैं। हिंदूवादी छवि, प्रखर वक्ता, संन्यासी और युवाओं में लोकप्रियता – ये कुछ ऐसे बिंदु हैं जो योगी को यहां दूसरे नेताओं से अलग बनाते हैं। इस मामले में वे पूर्व मुख्यमंत्री मायावती, मुलायम सिंह और कल्याण सिंह से कहीं आगे दिखाई देते हैं।

साल 2017 में जब भाजपा ने उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी की तो सभी को उम्मीद थी कि पार्टी नेतृत्व इस प्रदेश में किसी ऐसे चेहरे को कमान सौंपेगा जो कद्दावर और अनुभवी हो। हालांकि योगी आदित्यनाथ यहां भी सब पर भारी पड़े और भाजपा नेतृत्व ने उन्हें सूबे की कमान सौंप दी।

उस समय तक कई विश्लेषकों का मानना था कि गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर और बतौर सांसद लोकसभा में गोरखपुर का प्रतिनिधित्व कर चुके योगी इतने बड़े प्रदेश को कैसे संभालेंगे, जहां प्रशासनिक और राजनीतिक मोर्चे पर भारी चुनौतियां हैं। हालांकि, समय के साथ योगी आदित्यनाथ ने साबित कर दिया कि वे अपनी परंपरागत छवि को बरकरार रखते हुए बेहतर ढंग से उप्र की सरकार चला सकते हैं।

उप्र से बाहर भी योगी के प्रशंसक
योगी आदित्यनाथ इसी साल 19 मार्च को अपने कार्यकाल के तीन वर्ष पूर्ण कर चुके हैं। इससे पहले भाजपा का कोई नेता उप्र में लगातार इतने समय तक मुख्यमंत्री पद पर नहीं रहा। योगी की कार्यशैली और हिंदूवादी छवि की वजह से उनके प्रशंसक, जो उप्र से बाहर भी बड़ी संख्या में हैं, यह उम्मीद जताते हैं कि भविष्य में योगी को केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। कई तो उन्हें मोदी/शाह के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर भी देखने लगे हैं।

उप्र में विधानसभा चुनाव से पहले ही योगी आदित्यनाथ के कई प्रशंसक सोशल मीडिया के जरिए यह मांग करने लगे थे कि उनके नेता को मुख्यमंत्री बनाया जाए। हालांकि, योगी के करीबी एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि उन्होंने कभी मुख्यमंत्री बनने की इच्छा नहीं जताई। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व उन पर बहुत भरोसा करता है। इसके अलावा, केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनका हमेशा से अच्छा समन्वय रहा है।

‘सबका साथ, सबका विकास’ पर जोर
विश्लेष्कों का मानना है कि योगी नौकरशाही पर जबरदस्त पकड़ रखते हैं। पूर्व में प्रदेश की सत्ता बदलने के साथ ही अधिकारी और उनकी जाति को लेकर काफी चर्चा होती थी, लेकिन योगी के सत्ता संभालने के बाद यह मुद्दा बीते दिनों की बात लगती है। योगी के करीबी नेता बताते हैं कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ नारे पर अमल करते हुए अधिकारियों की योग्यता के आधार पर उन्हें जिम्मेदारी सौंपते हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यकाल की शुरुआत से ही भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। पिछले तीन वर्षों में 700 से अधिक ऐसे अधिकारी, कर्मचारी जबरन सेवानिवृत्त या निलंबित कर दिए गए जिन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं।

चर्चा में रहे ये फैसले
बतौर संन्यासी योगी आदित्यनाथ विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होते रहे हैं। फिर चाहे वह वाराणसी में देव दिवाली हो या अयोध्या का दीपोत्सव या मथुरा का कृष्णोत्सव, योगी की उपस्थिति हमेशा से चर्चा में रही है। श्रावण में कांवड़ियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा के फैसले पर विपक्ष ने कई सवाल उठाए लेकिन योगी अपने फैसले पर डटे रहे। इसके अलावा, कांवड़ यात्रा के मार्ग में मांस की दुकानें बंद कराने, प्रयागराज कुंभ में सफाई व्यवस्था और ऐसे आयोजनों के समय ड्रोन से निगरानी, सख्त कानून व्यवस्था जैसे फैसलों को जनता द्वारा सराहा गया।

योगी का नोएडा दौरा भी खूब चर्चा में रहा। कहा जाता है कि उत्तर प्रदेश में जो भी शख्स मुख्यमंत्री के तौर पर नोएडा आता है, उसकी गद्दी चली जाती है। माना जाता है कि पूर्व मुख्यमंत्री मायावती और अखिलेश यादव भी नोएडा आने से बचते थे लेकिन योगी ने नोएडा के दौरे कर इस अंधविश्वास को खारिज कर दिया।

अपराधियों में दिखा खौफ
इसके अलावा, योगी द्वारा कानून व्यवस्था में सुधार और अपराधियों के साथ कड़ाई से निपटने जैसे फैसलों ने भी देशभर में लोगों का ध्यान आकर्षित किया। योगी स्पष्ट कर चुके हैं कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय भी उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था में सुधार का उल्लेख कर चुका है। ऐसी तस्वीरें भी सोशल मीडिया में छाई रहीं जिनमें अपराधी तत्व यह कहते दिखे कि वे एनकाउंटर के बजाय जेल जाना पसंद करेंगे।