ये है कमाल का आइडिया: ठेठ देसी स्वाद के साथ बदल दिया फास्ट फूड का जायका

फोटो स्रोत: संबंधित कंपनी की वेबसाइट से लिया गया चित्र।
फोटो स्रोत: संबंधित कंपनी की वेबसाइट से लिया गया चित्र।

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। एक शानदार बिजनेस आइडिया कभी भी आ सकता है। फिर चाहे आप आसमान की बुलंदियों पर हों या किसी रेस्टोरेंट में ठेठ देसी जायके वाला खाना खा रहे हों। अमेरिका से पायलट बनकर लौटे रजत जायसवाल और उनके दोस्त फरमान बेग पर ये दोनों बातें लागू होती हैं। रजत ने बतौर पायलट आसमान की बुलंदियां छुईं तो अपने दोस्त के साथ ठेठ देसी जायके का जादू भी जगाया।

दोनों स्कूली दिनों से दोस्त हैं। रजत पढ़ाई के बाद स्पाइसजेट में पायलट बन गए तो फरमान यूके से बिनजेस मैनेजमेंट की डिग्री लेकर आईटी कंपनी में अधिकारी हो गए। दोनों ही दोस्तों का सपना था कि वे कुछ हटकर करें; नया, शानदार और अनूठा। इसके लिए घंटों दिमाग खपाते, नए-नए आइडिया पर बहस करते और उसकी संभावनाओं को लेकर जवाब तलाशते।

सवालों की उलझन के इस सिलसिले ने 2016 में आकार लिया जब सात साल बाद दोनों दोस्तों ने मिलकर फास्ट फूड चेन- ‘वाट अ बर्गर’ का आगाज किया। दरअसल इसका आइडिया भी एक फास्ट फूड स्टोर में बैठे हुए आया। एक बार वे दोनों किसी स्टोर में बैठे थे। वहां हर कोई बर्गर ऑर्डर कर रहा था।

रजत और फरमान ने गौर किया कि जो बर्गर लोगों को उपलब्ध कराया जाता है, यकीनन वो स्वादिष्ट है लेकिन उसका जायदा विदेशी है। चूंकि उसे बनाने की विधि भी विदेशी है। क्यों न बर्गर को भारत के शुद्ध ‘देसी स्वाद’ के साथ पेश किया जाए!

उन्होंने इस आइडिया के साथ 2016 में दिल्ली में अपना स्टोर खोला। हालांकि इस दौरान उनके मन में कई आशंकाएं भी थीं। अगर यह आ​इडिया फेल हो गया तो क्या होगा? परिजन ने सलाह दी थी कि किसी ऐसे कारोबार में हाथ आजमाना चाहिए जहां कामयाब होने की संभावना ज्यादा है। इसलिए रजत ने पायलट की नौकरी नहीं छोड़ी। वे नौकरी और कारोबार दोनों संभालने लगे।

‘वाट अ बर्गर’ की वह पहली पेशकश क्या थी जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया? इसके जवाब में रजत बताते हैं कि आलू अचारी को लोगों ने हाथोंहाथ लिया। उन्होंने बर्गर में अचार के स्वाद को शामिल करते हुए इसे बिल्कुल भारतीय पकवान बना दिया। इसी तरह उन्होंने दूसरे पकवानों के साथ कई प्रयोग किए जो लोगों की जुबान पर चढ़े तो खूब पसंद किए गए।

रजत इस कारोबार को संभालने के साथ बतौर पायलट नौकरी भी कर रहे हैं। उन्होंने इस दौरान जो बचत की थी, वह कारोबार को शुरुआती आकार देने में बहुत मददगार साबित हुई। हालांकि अब दोनों दोस्त इसका विस्तार विदेशों में करना चाहते हैं।

उन्होंने बताया कि उनके पकवानों को शुरू से ही ग्राहकों द्वारा बहुत सराहा गया है। साल 2019 तक तीन साल में लगातार बढ़ोतरी देखी गई। लॉकडाउन की पाबंदियों के कारण स्वाभाविक रूप से बिक्री पर असर पड़ा लेकिन बाद में पहले से ज्यादा तेजी आ गई।

रजत और फरमान कहते हैं कि वे यह जायका विदेशों के अलावा भारत की गांव-ढाणियों तक ले जाना चाहते हैं। इसके लिए पूरी टीम बहुत मेहनत कर रही है। एक स्टोर से हुई शुरुआत 60 आउटलेट तक पहुंच गई है। इन दोनों दोस्तों के हौसले और लगन की कहानी दो सीख देती है:

1. उच्च शिक्षा का मकसद सिर्फ नौकरी नहीं होता।
2. जायके में जादू है और अगर उसमें देसी तड़का लग जाए तो क्या कहने!