बंगाल चुनाव में खाता खुलवाने को भी तरस गई कांग्रेस, क्या बोले कपिल सिब्बल?

फोटो स्रोत: कपिल सिब्बल ट्विटर अकाउंट।
फोटो स्रोत: कपिल सिब्बल ट्विटर अकाउंट।

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने तीसरी बार बतौर मुख्यमंत्री पश्चिम बंगाल सरकार की कमान संभाल ली है। इस चुनाव में भाजपा ने भी जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए लंबी छलांग लगाई और वह 77 सीटें जीतने में कामयाब रही।

हालांकि चुनाव पूर्व कई एग्जिट पोल में यह संभावना जताई जा रही थी कि भाजपा सत्ता में आ सकती है। दूसरी ओर, इन नतीजों से कांग्रेस खेमे में खुशी की लहर थी, चूंकि भाजपा सत्ता से दूर रही। ऐसे में कांग्रेस नेताओं के रवैए पर सोशल मीडिया पर कई सवाल उठे। इनमें सबसे चर्चित सवाल यह था कि ‘देश की सबसे पुरानी और सबसे ज्यादा सत्ता में रही पार्टी कब तक दूसरों की हार में ही संतुष्टि तलाश करती रहेगी?’

इन चुनावों में मतदाताओं ने कांग्रेस को एक सीट भी नहीं दी। यह जानना जरूरी है कि एक समय था जब बंगाल में कांग्रेस का शासन हुआ करता था। यहां कांग्रेस सरकार बनाती और उसके नेता मुख्यमंत्री बनते। कालांतर में वामपंथी पार्टियों और तृणमूल के उदय के साथ कांग्रेस हाशिए पर चली गई और आज वह एक सीट के लिए भी तरस रही है।

जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल से इस स्थिति के संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने टिप्पणी करने इन्कार कर दिया। उन्होंने दलील दी कि यह राजनीतिक टिप्पणी करने का समय नहीं है। लिहाजा समय आने पर इस विषय पर चर्चा की जाएगी।

सिब्बल ने कहा कि तब वे अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने कोरोना महामारी से पैदा हालात का जिक्र करते हुए कहा कि आज हर पार्टी के लोगों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान दिए बयान कि ‘बंगाल जीतेंगे’, का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी प्रकार प्रधानमंत्री और हम सबको कहना चाहिए कि कोरोना महामारी के खिलाफ जारी संघर्ष को जीतेंगे। सिब्बल ने कोरोना महामारी से मुकाबले को जिंदगी और मौत की लड़ाई बताते हुए कहा कि इसे हर हाल में जीतना है।

बंगाल में कैसा रहा कांग्रेस का प्रदर्शन?
हाल में हुए बंगाल विधानसभा चुनावों में कांग्रेस अपना खाता तक नहीं खोल सकी। सीटों के लिहाज से उससे अच्छा प्रदर्शन राष्ट्रीय सेकुलर मजलिस पार्टी का रहा, जिसने एक सीट जीती। इसी प्रकार एक सीट निर्दलीय के खाते में गई।

कांग्रेस को, डाले गए कुल मतों में से 17,57,131 वोट मिले। यह कुल वोटों का सिर्फ 2.9 प्रतिशत था। जबकि भारतीय जनता पार्टी 38.1 प्रतिशत वोट पाने में सफल रही।