विदेश मंत्री एस. जयशंकर अपने ईरानी समकक्ष जवाद जरीफ के साथ
विदेश मंत्री एस. जयशंकर अपने ईरानी समकक्ष जवाद जरीफ के साथ

नई दिल्ली/भाषा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के अपने समकक्ष जवाद जरीफ से बृहस्पतिवार को मुलाकात की और दोनों नेताओं ने ईरान तथा अमेरिका के बीच तनाव के बाद खाड़ी क्षेत्र में तेजी से बदल रहे हालात पर चर्चा की। इराक में अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरान के अल-कुद्स बल के प्रमुख जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बहुत अधिक बढ़ गया है।

जलपान पर मुलाकात के दौरान जरीफ ने जयशंकर को वर्तमान हालात में तेहरान के रुख और समग्र स्थिति के बारे में जानकारी दी। बताया जाता है कि दोनों मंत्रियों के बीच भारत और ईरान के द्विपक्षीय संबंधों के कई पहलुओं और चाबहार बंदरगाह परियोजना में प्रगति पर बातचीत हुई।

एक बयान में विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों मंत्रियों के बीच आपसी हितों वाले क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों सहित खाड़ी क्षेत्र के मौजूदा घटनाक्रम पर चर्चा हुई। इसमें कहा गया है कि दोनों पक्षों के बीच ईरान के 2015 के परमाणु समझौते पर चर्चा हुई। इस समझौते को कॉम्प्रिहेन्सिव प्लान ऑफ एक्शन (जेसीपीओए) कहा जाता है और 2018 में अमेरिका इस समझौते से अलग हो गया था।

विदेश मंत्रालय ने बताया कि जयशंकर ने खाड़ी क्षेत्र में भारत के हितों को दोहराते हुए और शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए प्रयासों में मदद करने की बात कही। बताया जाता है कि दोनों मंत्रियों के बीच भारत और ईरान के द्विपक्षीय संबंधों के कई पहलुओं और चाबहार बंदरगाह परियोजना में प्रगति पर बातचीत हुई।

मंत्रालय ने कहा कि दोनों ही नेताओं ने तेहरान में संपन्न 19वीं संयुक्त आयोग बैठक (ज्वाइंट कमीशन मीटिंग) के दौरान द्विपक्षीय कारोबार मजबूत करने और चाबहार बंदरगाह के जरिए संपर्क को बढ़ाने के लिए हुई बातचीत तथा उसके सकारात्मक परिणाम को याद किया।

ईरान के विदेश मंत्री मंगलवार को तीन दिवसीय यात्रा पर ऐसे समय में भारत आए हैं जब पूरी दुनिया की निगाहें ईरान और अमेरिका पर हैं। जरीफ ने बुधवार को कहा, खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम करने में भारत भूमिका निभा सकता है क्योंकि वह एक महत्वपूर्ण पक्ष है।

वैश्विक मामलों पर नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग को संबोधित करते हुए जरीफ ने अमेरिका के ट्रंप प्रशासन को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि कासिम सुलेमानी की हत्या की घटना अज्ञानता और अहंकार दिखाती है। भारत यह कहता रहा है कि वह चाहेगा कि यथाशीघ्र तनाव घटे। भारत के अनुसार, क्षेत्र में अपने महत्वपूर्ण हितों के मद्देनजर वह ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और कतर सहित प्रमुख देशों से संपर्क बनाए हुए है।

सुलेमानी ईरान के अल-कुद्स बल के प्रमुख थे और तीन जनवरी को बगदाद अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के पास काफिले पर हुए अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए थे। पिछले सप्ताह ईरान ने इराक में दर्जनों मिसाइलें कम से कम उन दो ठिकानों को लक्ष्य कर दागीं जहां अमेरिकी सेना और गठबंधन बल हैं।