विदेश मंत्री एस जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर

नई दिल्ली/भाषा। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी को दिए गए कठोर संदेश में बुधवार को कहा कि गलवान घाटी में हुई अप्रत्याशित घटना का द्विपक्षीय संबंधों पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने चीन से स्थिति में सुधार करने वाले कदम उठाने को कहा है। विदेश मंत्री ने चीनी समकक्ष से स्पष्ट कहा कि गलवान में जो हुआ, वह चीन द्वारा पहले से ही सोची-समझी और योजनाबद्ध ढंग से की गई हरकत थी।

जयशंकर और वांग की टेलीफोन पर बातचीत हुई। यह बातचीत दोनों देशों की सेनाओं के बीच सोमवार रात को हुए हिंसक संघर्ष के बाद हुई जिसमें एक कर्नल सहित 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए।

विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘15 जून को गलवान घाटी में हुए हिंसक संघर्ष को लेकर विदेश मंत्री ने भारत सरकार के विरोध को कड़े शब्दों में व्यक्त किया है।’ उसने कहा कि जयशंकर ने छह जून को दोनों पक्षों के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों के बीच बैठक में बनी सहमति का उल्लेख किया जिसके अनुसार वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव को कम करने के लिए काम किया जाएगा।

जयशंकर ने कहा कि स्थिति में सुधार हो ही रहा था कि चीनी पक्ष ने एलएसी के भारतीय इलाके की ओर एक ढांचा खड़ा करने का प्रयास किया। विदेश मंत्रालय ने वार्ता का ब्योरा देते हुए कहा, ‘विदेश मंत्री ने रेखांकित किया कि पहले कभी नहीं हुए इस घटनाक्रम का द्विपक्षीय संबंधों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। समय की मांग है कि चीनी पक्ष अपनी कार्रवाई की समीक्षा करे और (स्थिति में) सुधार के लिए कदम उठाए।’

मंत्रालय ने बातचीत का ब्यौरा देते हुए कहा, ‘दोनों पक्षों को छह जून को वरिष्ठ कमांडरों के बीच बनी सहमति को गंभीरता और सतर्कता से लागू करना चाहिए।’ विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘दोनों पक्षों के सैनिकों को द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए। उन्हें वास्तविक नियंत्रण रेखा का दृढ़ता से सम्मान करना चाहिए तथा इसे बदलने के लिए एकपक्षीय ढंग से कोई कदम नहीं उठाना चाहिए।’

उसने कहा कि इस बात की सहमति बनी कि कुल मिलाकर स्थिति से जिम्मेदार ढंग से निबटा जाएगा तथा दोनों पक्ष छह जून को तनाव कम करने को लेकर बनी सहमति को ईमानदारी से लागू करेंगे।