पिछले दिनों नीति आयोग की एक प्रमुख सदस्य विवेक डिबरॉय ने मांग की थी कि कृषि आय पर भी कर लगाया जाना चाहिए। देश में कई ऐसे किसान है जिनकी आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत है और उन पर कर का प्रावधान भी नहीं है। हालाँकि देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने डिबरॉय की इस मांग को सिरे से ठुकरा दिया परंतु अब सोशल मीडिया पर इस विषय पर चर्चा जोरों से हो रही है। देश में कई ऐसे अमीर किसान है जिनके पास करो़डों की संपत्ति है और जिस तरह अन्य क्षेत्रों में अग्रणी उद्योगपति और व्यवसायिक व्यक्तियोंें पर कर लगाया जाता है उसी तरह इन अमीर किसानों को भी कर के दायरे में लाया जाना चाहिए। देश के गरीब किसान को परेशान नहीं किया जाना चाहिए परंतु आर्थिक रूप से मजबूत व्यक्ति को देश निर्माण के लिए कर देने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। अनेक अग्रणी अर्थशा्त्रिरयों का यही मानना है कि अगर देश के विकास रथ को गति देनी है तो कृषि क्षेत्र को भी कर के दायरे में लाना होगा। जिस तरह छोटे व्यवसायियों को कर से छूट दी गयी है उसी तरह किसानों के लिए भी इसी तरह के मानदंड तैयार किए जाने चाहिए। सरकार को शायद यह लग रहा है कि अगर किसानों को कर के दायरे में लाने की कोशिश की जाए तो विपक्ष इस मुद्दे का ़फायदा उठाकर किसानों को भ़डकाकर सरकार की परेशानियों को बढा सकता है। यह विषय संवेदनशील है परंतु इस बार साझा बहस करने की भी आवश्यकता है। ि़फलहाल संवैधानिक प्रावधानों के कारण सरकार कृषि आय पर कर नहीं लगा सकती है। हालाँकि राज्य सरकारों के पास इस विषय पर विचार करना आवश्यक है। देश के अधिकांश किसानों की आर्थिक स्थिति ख़राब है और इन पर किसी भी तरह के कर का भार सरकार के लिए हानिकारक ही साबित होगा। जिस तरह से रसोई गैस पर दी जा रही सब्सिडी को छो़डने के लिए सरकार ने जनता को प्रोत्साहित किया था उसी तरह अगर अमीर किसानों को स्वेच्छा से अगर कर के दायरे में आने के लिए प्रोत्साहित किया गया तो इस से देश की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी। इसके लिए पहले प्रशासन को यह पता करना होगा कि देश में ’’अमीर किसान’’ की संख्या है कितनी, साथ ही अगर उनको कर के दायरे में आने के लिए प्रोत्साहित किया जाए तो देश को कितना मुनाफा हो सकता है। एक अन्य समस्या यह भी है कि देश के अनेक नेता खुद को किसान बताकर कर से बचने की पूरी कोशिश करते हैं और अगर कृषि आय पर कर लगाया जाने लगा तो ऐसे नेताओं को भी कर के दायरे में आना होगा। राजनेता अपनी ऊपरी आय को सुरक्षित रखने के प्रयास में भी कृषि आय पर कर का विरोध कर रहे हैं। सरकार के सम्मुख सबसे बेहतर विकल्प है कि कृषि आय को स्वेच्छा से भरने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाए। देश के अधिकांश किसान खुद्दार होते हैं और संभव है कि अगर सरकार ऐसा कोई प्रस्ताव लाती है तो किसान उसमें ब़ढच़ढ कर भाग लेंगे। साथ ही कृषि आय कर को अगर कृषि क्षेत्र के विकास और आधुनिकीकरण के लिए उपयोग किया जाए तो किसानों की भागीदारी की सम्भवता और ब़ढ जाती है।